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मकर संक्रांति पर न करें ये भूल…

कल मकर संक्रांति का पर्व है, इस दिन सूर्य देव के पूजन का विधान है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार सूर्य नवग्रह में राजा का पद संभाले हुए हैं। इस दिन के उपरांत खरमास पर विश्राम लग जाता है और समस्त शुभ एवं मांगलिक कार्यों का आरंभ हो जाता है। शास्त्र कहते हैं उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायन रात होती है। मान्यता है की 14 जनवरी को देवताओं की सुबह होती है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस पर्व को मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तरायण की ओर गति करता है इसलिए इस पर्व को उत्तरायणी भी कहते हैं।

सूर्य कैलेंडर के अनुसार इस अवधि में दिन और रात बिल्कुल बराबर होते हैं। ज्योतिष के अनुसार मकर से अभिप्राय मकर राशि से है तथा संक्रांति से अभिप्राय परिवर्तन से है। संक्राति प्रत्येक महीने में होती है जबकि सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। उत्तरी गोलार्द्ध में शीतकालीन आयनांत के दौरान सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है।

ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को राजपक्ष अर्थात सरकारी क्षेत्र एवं अधिकारियों का कारक ग्रह बताया गया है। व्यक्ति कि कुंडली में सूर्य बलवान होने से उसे सरकारी क्षेत्र में सफलता एवं अधिकारियों से सहयोग मिलता है। कैरियर एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में उन्नति के लिए भी सूर्य की अनुकूलता अनिवार्य मानी गई है। बुरे समय से बचने के लिए मकर संक्रांति पर न करें ये भूल

मकर संक्रांति पर देर तक न सोएं। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का खास महत्व है। लोग इस दिन पवित्र स्थानों पर स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। यह ध्यान रहे कि सूर्य भगवान की आराधना का सर्वोत्तम समय सुबह सूर्योदय का ही होता है।

आदित्य हृदय का पाठ करें।

तेल से बने पदार्थ न खाएं।

नमक नहीं खाने तथा एक समय ही भोजन करने से सूर्य भगवान कि कृपा बनी रहेगी।

इस मंत्र जाप से भगवान सूर्य की अपार कृपा पा जा सकती है-  ॐ घृणि: सूर्याय नम:

कहते हैं इस रोज किया गया दान सौ गुणा अधिक फल देता है। अपनी क्षमता के अनुसार जितना हो सके दान करें और पुण्य कमाएं।