Fire आंखों के सामने जिंदा जल गईं मासूम बेटियां, खौफनाक मंजर देख बेहोश हुईं दोनों मां, सदमे में परिवार

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एक परिवार में दो बच्चियों के जन्म लेने के बाद घर खुशियां से भरा था और दोनों बच्चियों का अकीका एक साथ कराने की भी तैयारी चल रही थी। लेकिन परिवार में अचानक इतना बड़ा हादसा हो जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा होगा। जिन बच्चियों को जन्म लिए अभी सिर्फ एक महीना ही हुआ था, उनको आंखों के सामने जिंदा जलते हुए देख हर किसी का कलेजा फट रहा था और परिजन बेबस थे। इस दर्दनाक हादसे को परिवार कभी नहीं भूल पाएगा। दरअसल, घर में भट्ठी पर खाना बनाया जा रहा था इसी बीच सिलिंडर में आग लग गई। आग लगते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई और परिजन घर से बाहर निकल आए लेकिन, दोनों बच्चियां अंदर ही रह गईं।

ऐसे हुआ बड़ा हादसा
मेरठ में खंदक बाजार के भीड़ वाले इलाके में इदरीश के 50 गज के मकान में दो मासूम बच्चियों ने कुछ दिनों पहले ही जन्म लिया था। दोनों बच्चियों की चहल-पहल से घर खुशियों से भरा था। रविवार शाम के करीब सात बजे थे और घर के अंदर भट्ठी पर खाना बनाया जा रहा था। इसी बीच गैस बंद हो गई। परिवार की महिला ने जैसे ही माचिस की तीली जलाई तो सिलिंडर ने आग पकड़ ली। महिलाएं तो जान बचाकर बाहर आ गईं, लेकिन अंदर बच्चियां आग की चपेट में आ गईं। मकान आग का गोला बन चुका था। वहीं मासूम बच्चियां अंदर जल रहीं थीं और बाहर बेबस परिजन दहाड़े मारकर बिलख रहे थे।

इदरीश के चार बेटे और छह बेटियां हैं। दो बेटे और दो बेटियां साउथ अफ्रीका में रहते हैं। एक महीने पहले ही बेटी शहला ने एक बच्ची को जन्म दिया। इदरीश के बेटे जुनेद की पत्नी को भी 21 दिन पहले बेटी हुई। दो बच्चियों का जन्म हुआ तो जुनैद और उसकी बहन ने दोनों का अकीका एक साथ रखने का फैसला किया। सोमवार को घर में दावत थी और रविवार को यह हादसा हो गया।

जिगर के टुकड़ों को बचाने के लिए आग में कूदने को तैयार थीं माएं
आग लगने के बाद घर से बाहर आईं बच्चियों की माएं आग में कूदने को तैयार थीं। उन्हें किसी रतह लोगों ने संभाला। आंखों के सामने जिंदा दोनों बेटियां जल गईं और परिवार बेबस रहा। आग बुझते ही परिवार के लोग मकान में घुस गए, लेकिन तब तक सामान के साथ दोनों मासूमों का कंकाल ही बचा था। घनी आबादी खंदक बाजार में ये खौफनाक मंजर जिसने भी देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए।
आग लगने से जिंदा जल गईं दो मासूम बच्चियां।


ननद-भाभी बेहोश
भीषण आग में अपनी-अपनी बेटियों को जलता देखकर जुनैद की पत्नी शहीना व उसकी ननद शैला बेहोश हो गई। होश में आईं तो दोनों मासूमों को बचाने के लिए अंदर घुसने की कोशिश करने लगीं। लोगों ने किसी तरह से उन्हें रोका।

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल: जान पर खेल सिलिंडर बाहर खींच लाए लोग
इदरीश के घर में आग लगते ही कोहराम मच गया। आग की ऊंची ऊंची लपटें उठ रहीं थी। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और जान जोखिम में डाल आग लगे सिलिंडर को बाहर खींच लाए। यहां लोगों ने बालू डालकर आग को बुझा दिया। मासूब बच्चियों को न बचा पाने का दर्द यहां हर किसी के चेहरे पर दिखा।

खंदक बाजार मिश्रित आबादी का इलाका है। जिस जगह इदरीश का घर बना है। वहां से चंद कदम की दूरी पर हिंदू परिवार भी रहते हैं। लगभग 80 प्रतिशत बाजार बंद हो चुका था। तभी आग लगने का शोर मच गया। लोग उस ओर दौड़ पड़े। परिवार के लोग बाहर खड़े चिल्ला रहे थे। पूछने पर पता चला कि नवजात बच्चियां अंदर हैं। कुछ लोगों ने साहस भी दिखाया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घर का हर कोना आग से घिरा था। इसी दौरान पड़ौसी दिलीप गुप्ता क्षेत्रीय निवासी शोभित की मदद से गैस सिलिंडर बाहर खींच लाए। लोगों ने आग पर काबू पाया। घर की आग भी लोगों ने बुझानी शुरु कर दी। तभी दमकल की दो गाड़ियां आ गई और आग को बुझाया।

देखते ही देखते जमा हो गई भीड़
घर में आग लगने के बाद आस पास के लोग एकत्र हो गए। पूरी सड़क भीड़ से घिर गई। दमकलकर्मियों ने पुलिस की मदद से भीड़ को हटाया। तब जाकर आग बुझाने का काम शुरु हो सका। घर ऐसी जगह पर बना था, जहां तक पहुंचने के लिए दमकल को मशक्कत करनी पड़ी।

रोते रहे पिता
परिवार के हर व्यक्ति का रो-रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदारी महिलाएं भी रोती बिलखती पहुंच गई लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मां बदहवास थीं। दोनों सुदबुद खो चुकी थीं। जुनैद और इमरान की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी। रोते हुए वह बोल रहे थे कि मुझे बच्ची को दूध पिलाना है, वह बहुत देर से भूखी है।

आग में दो मासूमों की मौत की सूचना पर सीओ कोतवाली अरविंद चौरसिया वहां पहुंच गए। उन्होंने लोगों की मदद से दोनों परिवारों को संभाला। आस पास के बुजुर्गों से बात की गई। तय हुआ कि रात में ही दोनों बच्चियों का दफीना होगा। दोनों को कपड़े में लपेट दिया गया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही उनका दफीना हुआ।

 

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