Guru Nanak Jayanti 2021: इमली के पेड़ के नीचे सुनाया शबद, बावड़ी के खारे पानी को कर दिया मीठा

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Guru Nanak Jayanti 2021 । सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव महाराज अपनी दूसरी यात्रा के दौरान 504 साल पहले इंदौर बेटमा और ओंकारेश्वर आए थे। जहां उन्होंने शबद सुनाया वहा ऐतिहासिक महत्व के गुरुघर बन गए। उनके 1517 में आगमन का उल्लेख पुरातन ग्रंथ गुरु खालसा में मिलता है। इन गुरुद्वारों में आज भी हर साल प्रकाश पर्व पर हजारों की संख्या में संगत एकत्रित होती है।

समाजजनों का कहना है कि जहां इमली के पेड़ के नीच बैठकर शबद सुनाया उस स्थान पर गुरुद्वारा इमली साहिब औऱ बेटमा में उनके आने से बावड़ी का खारा पानी मीठा हो गया उस स्थान पर गुरुद्वारा बावड़ी साहब बना है। इसी तरह ओंकारेश्वर में ओंकार की महत्ता बताई वहां गुरु नानकदेव महाराज गुरुद्वारा ओंकारेश्वर का निर्माण हुआ।

गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष मनजीत सिंह भाटिया कहते है कि जहां-जहां नानकदेव ने शबद सुनाए वहां समाज ने ऐतिहासिक महत्व के गुरुद्वारे बनाए। इनकी व्यवस्था गुरूसिंघ सभा संभाल रही है। संगत की सुविधा के लिए इन गुरुद्वारों का विस्तार में किया गया है। साथ लगातार यह क्रम जारी है। सचिव जसबीर सिंह गांधी बताते है कि जहां नानक आए वह स्थान सिख समाज के आस्था केंद्र है। यहां हर साल हजारों की संख्या में मत्था टेकने समाजजन जुटते है।

इमली साहिब: खान नदी के किनारे लगाया आसन

गुरु नानकदेव महाराज उनकी दूसरी यात्रा के दौरान दक्षिण से होते हुए इंदौर आए थे। यहां कान्ह नदी के किनारे इमली के पेड़ के नीचे आसन लगाकर शबद सुनाया था इसलिए जब यहां गुरुद्वारा बनाया गया तो उसका नाम गुरुद्वार इमली साहिब रखा गया। पहले इस स्थान की सेवा संभाल उदासी मत के पैरोकारी ने संभाली। इसके बाद होलकर स्टेट के सहयोग के लिए फौज पंजाब से आई तो उन्होंने गुरुद्वारे की व्यवस्था संभाली।

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