15 नवंबर तक घोषित होंगे पंचायत चुनाव: जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सदस्य पदों के लिए आरक्षण प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश

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कटनी। राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह द्वारा कल 21 अक्टूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ली गई जिला कलेक्टरों की बैठक के बाद त्रि स्तरीय पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है।

राज्य निर्वाचन आयोग हर हाल में पंचायत चुनाव 31 दिसंबर से पहले करा लेना चाहता है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी कलेक्टरों को चुनाव सम्बन्धी सभी तैयारियां जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि कोरोना सहित कुछ अन्य कारणों से प्रदेश में त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव अब तक टलते चले आ रहे। अगर 31 दिसम्बर के पहले चुनाव नहीं हुए तो राज्य शासन को न केवल ग्राम पंचायतों और जनपदों में नए सिरे से आरक्षण करना होगा बल्कि नई मतदाता सूची भी तैयार करनी होगी।

नई मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इसीलिए राज्य शासन और राज्य निर्वाचन आयोग इसी साल के अंत तक त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव सम्पन्न करा लेना चाहता है।

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बताया गया कि पंचायत चुनावों को लेकर कल 21 अक्टूबर को निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह द्वारा सभी कलेक्टरों की बैठक बुलाई गई थी।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आयोजित इस बैठक में शासन की ओर से जानकारी दी गई कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार है साथ ही पंच – सरपंच से लेकर जनपद सदस्य और जनपद अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। केवल जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए ही आरक्षण होना बाक़ी है। बैठक में निर्वाचन आयुक्त द्वारा जिला पंचायत आरक्षण की शेष प्रक्रिया भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश शासन को दिए गए हैं। माना जा रहा कि राज्य शासन आगामी नवंबर माह के दूसरे सप्ताह तक जिला पंचायत की आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण करा लेगा। यह प्रक्रिया पूरी होते ही निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की तिथियों की घोषणा कर देगा। यह भी खबर है कि त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव तीन चरणों में होंगे जिसका पहला चरण नवम्बर माह में ही होगा। दिसम्बर के तीसरे सप्ताह तक ग्राम पंचायत,जनपद पंचायत और जिला पंचायत चुनाव के लिए मतदान पूर्ण कर नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी।
चुनाव अगले महीने शुरू हो सके इसके लिए कलेक्टरों को मतदान केंद्रों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनकी कमियों को समय रहते दूर किया जा सके। इसके अलावा संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदनकेन्द्रों की सूची भी तैयार करने को कहा गया है ताकि सुरक्षा के माकूल इंतज़ाम किये जा सकें। अगर सबकुछ ठीक रहा तो निर्वाचन आयोग 15 नवम्बर के बाद किसी भी दिन पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

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निकाय चुनाव फिर टलने के आसार
पंचायतों की तरह ही प्रदेश के तीन सैकड़ा से भी अधिक नगरीय निकायों का कार्यकाल भी डेढ़ साल पहले ही पूर्ण हो चुका है। इन निकायों में नगर निगम सहित नगर पालिका और नगर परिषद भी शामिल है। निकाय चुनावों के लिए भी मतदाता सूची तैयार कर ली गई थी। अध्यक्ष, पार्षद और महापौर पदों के लिए आरक्षण प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी पर चुनाव नहीं कराए जा सके। निकायों में सम्पन्न कराई गई आरक्षण प्रक्रिया को लेकर अनेक जगह असन्तोष देखा गया। इस प्रक्रिया में रोस्टर का पालन नहीं किये जाने के आरोप लगाते हुए इसे न्यायालय में चुनौती भी दी गई। प्रदेश के उच्च न्यायालय सहित खण्डपीठो में भी निकाय चुनावों को लेकर याचिकाएं विचाराधीन हैं,हालांकि निर्वाचन आयोग के अनुरोध पर अब इन याचिकाओं की संयुक्त रुप से सुनवाई उच्च न्यायालय में होना है बावजूद इसके इतनी जल्दी याचिकाओ का निपटारा संभव नहीं लग रहा। ऐसे में इस साल के अंत तक निकाय चुनाव हो पाना संभव नहीं लग रहा। माना जा रहा कि प्रदेश में एक डेढ़ साल से लंबित चुनाव में अभी कुछ महीनों का वक्त और लग सकता है।

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