जबलपुर के भेड़ाघाट में शरद पूर्णिमा की रात संगमरमरी वादियां देख मंत्रमुग्‍ध हो जाते हैं सौंदर्य प्रेमी

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Sharad Purnima 2021: जबलपुर। विश्व विख्यात ओशो ने कहा था कि जबलपुर में इस जगत का, इस पृथ्वी का सुंदरतम स्थल है-भेड़ाघाट। यहां दो मील तक नर्मदा संगमरमर की पहाड़ी के बीच से गुजरती हैं। शरद पूर्णिमा की रात में जो इस नजारे को एक बार देख ले, वह जिन्दगी भर भूल नहीं सकता। प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा की रात आसमान पर पूर्णचंद्र और नर्मदा के कैनवास पर बनते उसके अक्स को निहारने सौंदर्य प्रेमी एकत्र होते हैं। इस वर्ष भी ऐसा ही होगा। हालांकि कोविड गाइडलाइन का पालन अनिवार्य होगा। कुछ बंधन होंगे, जिनका पालन करते हुए अनुशासित तरीके से अपूर्व सौंदर्य का दर्शन लाभ लिया जा सकता है।

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पंचायत ने शुरू की तैयारी : शरद पूर्णिमा को लेकर भेड़ाघाट नगर पंचायत ने पूर्व तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले कुछ वर्षों में भेड़ाघाट तक पहुंचने का एक और रास्ता सामने आ गया है। इसके लिए चौकीताल और गोपालपुर पार करना होता है। जब यह रास्ता खत्म होता है, तो नजरों के सामने होता है विश्वविख्यात जल प्रपात धुंआधार। दर्शक इसकी एक झलक पाकर अचंभित रह जाते हैं।

 

इसके किनारे फुहार का आनंद लेते हुए शरद पूर्णिमा के चांद को निहारने का आनंद कई गुना बढ़ जाता है। बंदरकूदनी वाले बिंदु को ऊपर से निहारने पर नर्मदा का समूचा दृश्य अत्यंत नयनाभिराम रूप में सामने आता है। जो इसे आंखों में बसा लेता है, वह सालों साल इसे याद करके आनंदित होता रहता है। यही वजह है कि जबलपुर से मुंबई, पूना फिर अमेरिका जाने के बाद भी ओशो धरती के इस स्वर्ग को भुला नहीं पाए। अपने प्रवचनों में उन्होंने इसका स्मरण बड़ी खूबसूरती के साथ किया।

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