कोरोनावायरस के कारण लावारिस हुए 300 बच्चों को जब मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद नियम शर्तों के कारण कोई सहायता नहीं मिली तो कलेक्टर मनीष सिंह ने शहर के समाजसेवियों से मदद मांगी है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि कोरोनावायरस के कारण लावारिस हुए बच्चों को सरकार की तरफ से ₹5000 मासिक पेंशन दी जाएगी।
इस घोषणा की दिनांक तक लावारिस से तात्पर्य होता था ऐसा परिवार जिसमें कमाने वाले मुखिया की मृत्यु हो गई हो।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ब्यूरोक्रेट्स ने लावारिस की परिभाषा बदल दी। सिर्फ ऐसे बच्चों की मदद की गई जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हुई हो। फिर भले ही उनके पास कितनी भी संपत्ति क्यों ना हो। ऐसे बच्चों को मदद नहीं दी गई जिनके माता-पिता में से कोई एक जिंदा बच गया। फिर भले ही उस मृत्यु के कारण परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज क्यों ना हो गया हो।
इंदौर शहर में कुल 500 से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिन्हें सहायता की जरूरत है। उनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हुई है परंतु अब खाने के लिए रोटी नहीं है। कलेक्टर ने बड़े प्रयास करके करीब 200 बच्चों का प्रबंध कर दिया है लेकिन 300 बच्चों को सहायता की आवश्यकता है।
कलेक्टर ने इंदौर शहर के नागरिकों से मदद की अपील की है। क्योंकि कलेक्टर को पता है कि इन बच्चों को मदद की जरूरत है। अभी सहायता नहीं की तो इनका फ्यूचर खराब हो जाएगा।
महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास बुधोलिया ने बताया कि जो दान दाता, स्वयंसेवी, समाजसेवी, सामाजिक, व्यापारिक, औद्योगिक संगठन एवं आमजन ऐसे बच्चों को सहायता करना चाहते है वे महिला एवं बाल विकास विभाग प्रशासनिक संकुल के रूम नं. 206 दूसरी मंजिल सम्पर्क कर सकते हैं।
वे इसके लिए कार्यक्रम अधिकारी के मोबाइल नंबर 7999452570 या सहायक संचालक राकेश वानखेडे के मोबाइल नंबर 7024663301 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।