हाईकोर्ट ने मांगी है प्राइवेट स्कूलों से फीस की डिटेल्स

प्राइवेट स्कूलों में फीस के विवाद को लेकर दाखिल हुई याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय आदेशित किया था कि सभी स्कूल विस्तार पूर्वक बताएं कि वह किस-किस मद में फीस ले रहे हैं। हाईकोर्ट ने इसके लिए हेड ऑफ द डिपार्टमेंट स्कूल एजुकेशन को ऑर्डर किया था। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। परंतु समाचार लिखे जाने तक जिला शिक्षा अधिकारियों ने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया।

जनता और सरकार को करोड़ों की चपत लगाते हैं प्राइवेट स्कूल

यदि खुली जांच हो जाए तो एक बड़ा घोटाला सामने आएगा। दरअसल प्राइवेट स्कूल जनता और सरकार को करोड़ों का चूना लगाते हैं। एक तरफ पेरेंट्स से लगभग एक दर्जन मदों में फीस वसूली की जाती है वहीं दूसरी तरफ सरकारी दस्तावेजों में पूरी कमाई को टेक्स्ट से बचाने के लिए फर्जीवाड़ा किया जाता है। यदि प्राइवेट स्कूलों में फीस का ऑडिट कर दिया जाए तो एक बड़ा घोटाला सामने आएगा और सरकार को मोटी रकम प्राप्त होगी। यहां उल्लेख करना आवश्यक है कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के बड़े-बड़े स्कूल संचालित हैं।