आ गई आर्टिफिशियल किडनी जो खत्म करेगी डायलिसिस का झंझट? जानिए कैसे काम करती है और इससे क्‍या फायदे होंगे

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Artificial Kidney: किडनी से जुड़ी बीमारियों के कारण या इसके फेल्योर के कारण दुनियाभर में हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है. किडनी के मरीजों के लिए ब्लड प्यूरिफिकेशन (Blood purification) कराना जरूरी होता है. इसी का कृत्रिम तरीका है डायलिसिस (Dialysis). क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीजों के शरीर में ब्लड में जमा कचरे, एक्सट्रा पानी और​ विषाक्त पदा​र्थ को बाहर निकालने के लिए यह जरूरी होता है.

लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आर्टिफिशियल किडनी तैयार की है, जिससे मरीजों को डायलिसिस की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. यह सोचिए कि आपके शरीर में एक ऐसी किडनी होगह जिसके साथ भविष्य में कभी डायलिसिस की टेंशन ही नहीं रह जाएगी. यह आपको किडनी से जुड़ी बीमारियों से दूर रखेगी. ताकि कभी किडनी खराब होने पर ट्रांसप्लांट को लेकर कोई तनाव नहीं रह जाएगा.

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क्या है आर्टिफिशियल किडनी?

यूसीएसएफ (University of California, San Francisco) के स्कूल ऑफ फार्मेसी एंड मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक कृत्रिम किडनी बनाई है, जो किडनी के मरीजों को डायलिसिस से छुटकारा दिलाएगी. किडनी प्रोजेक्ट की टीम द्वारा बनाई गई यह इम्प्लांटेबल बायोआर्टिफिशियल किडनी है. बताया जा रहा है कि यह किडनी संबंधी बीमारियों के मरीजों को डायलिसिस मशीनों और ट्रांसप्लांट के लिए लंबे इंतजार से छुटकारा दिलाएगी.

किडनी प्रोजेक्ट एक नेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य किडनी फेलियर के उपचार के लिए सूक्ष्म, चिकित्सा द्वारा प्रत्यारोपित और बायोआर्टिफिशियल किडनी तैयार करना है. इस कृत्रिम किडनी को किडनीएक्स से 650,000 डॉलर (करीब 48,241,280 रुपये) का पुरस्कार भी मिल चुका है. टीम अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र से चुनी गई छह विजेता टीमों में से एक थी.

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किडनी प्रोजेक्ट ने अपनी इम्प्लांटेबल किडनी के प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया है. बता दें कि किडनीएक्स अमेरिकी स्वास्थ्य, मानव सेवा विभाग और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के बीच एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी है. इसकी स्थापना गुर्दे की बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार में नई तकनीकों को लाने के लिए की गई है.

स्मार्टफोन जैसा आकार, ऐसे काम करती है

इस ​आर्टिफिशियल किडनी का आकार स्मार्टफोन के बराबर बताया जा रहा है. कृत्रिम किडनी में दो महत्वपूर्ण भागों हेमोफिल्टर और बायोरिएक्टर को जोड़ा गया है. हेमोफिल्टर रक्त से अपशिष्ट उत्पादों और विषाक्त पदार्थों को हटाता है. वहीं बायोरिएक्टर रक्त में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन जैसे कार्य करता है. प्रीक्लिनिकल सुपरविजन के लिए इस उपकरण को सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया. बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में द किडनी प्रोजेक्ट ने अलग-अलग प्रयोगों में हेमोफिल्टर और बायोरिएक्टर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है.

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किडनी के मरीजों को होगी बड़ी

आर्टिफिशियल किडनी ब्लड को पतला करने या इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाओं की जरूरत के बिना कृत्रिम किडनी अकेले रक्तचाप द्वारा संचालित हुई. यूसीएसएफ स्कूल ऑफ फार्मेसी एंड मेडिसिन के एक फैकल्टी सदस्य ने बताया कि आर्टिफिशियल किडनी मरीजों को डायलिसिस की तुलना में ज्यादा गतिशीलता और बेहतर शारीरिक परिणाम प्रदान करेगी. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह किडनी मरीजों के लिए बड़ी राहत होगी और उनके जीवन को बेहतर बनाएगी.

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