ओबीसी महासभा के इस याचिका ने विवाद को जन्म दे दिया है। इसमें कई ऐसे बिंदु डाले गए हैं, जो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगाने का प्रयास कर रहे हैं।ओबीसी महासभा की ओर से अधिवक्ता उदय कुमार ने ये याचिका लगाई है। इसको हाईकोर्ट में पूर्व से लंबित याचिकाओं के साथ लिंकअप करने की गुहार भी लगाई गई है। याचिकाकर्ता ने अपने 8वें पैराग्राफ में न्यायालय की निष्पक्षता को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने लिखा है कि हिंदू धर्म 4 वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्रों में विभाजित हैं। इस चतुर्वर्ण से बाहर की जातियां पंचमय जातियां कहलाती थीं, जिसे समाज में सबसे निचला स्थान मिला था। आज भी ये मानसिकता मौजूद है।
ऐसे में ओबीसी आरक्षण में सुनवाई करने वाला जज ओबीसी या सामान्य वर्ग का रहेगा, तो सुनवाई को प्रभावित करेगा। तर्क दिया गया है कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होगा। बहरहाल, ओबीसी आरक्षण के मामले पर 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट सुनवाई करने जा रहा है।