Shivraj Cabinet Decisions: मध्‍य प्रदेश में अब स्व-सहायता समूहों की महिलाएं चलाएंगी सातों पोषण आहार संयंत्र

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Shivraj Cabinet Decisions: भोपाल। राज्य सरकार ने प्रदेश के सातों सरकारी पोषण आहार संयंत्र एमपी एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड से वापस लेकर एक बार फिर महिला स्व-सहायता समूहों को सौंप दिए हैं। अब समूहों के परिसंघ (फेडरेशन) के माध्यम से महिलाएं यह संयंत्र चलाएंगी। मंगलवार को कैबिनेट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने छोटे समूह बनाकर रेत खदानें नीलाम करने, रेत की प्रारंभिक आधार मूल्य 150 से बढ़ाकर 250 रुपये घन मीटर करने सहित प्रदेश की 12 सड़कों पर टोल टैक्स वसूलने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी है।

शिवराज कैबिनेट ने कमल नाथ सरकार के दो फैसलों को बदल दिया है। पहला तो सरकारी पोषण आहार संयंत्र महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने का है और दूसरा रेत खदानों के छोटे समूह बनाकर नीलाम करने का। सरकार ने तय किया है कि अब सातों (धार, देवास, होशंगाबाद, सागर, मंडला, शिवपुरी एवं रीवा) संयंत्र महिलाएं चलाएंगी। भोपाल संभाग के पांच जिलों को छोड़कर शेष प्रदेश के आंनबाड़ी केंद्रों में इन संयंत्रों से पोषण आहार सप्लाई किया जाएगा। संयंत्रों में प्रति माह 750 करोड़ रुपये का पोषण आहार तैयार होगा।

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समूहों के सातों परिसंघ पोषण आहार उत्पादन के साथ वितरण का काम भी संभालेंगे। इससे समूहों से जुड़ी महिलाओं को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा। ज्ञात हो कि कमल नाथ सरकार ने अक्टूबर 2019 में ये संयंत्र एमपी एग्रो को सौंप दिए थे। जबकि शिवराज सरकार ने 13 मार्च 2018 को पोषण आहार उत्पादन का काम समूह की महिलाओं को सौंपते हुए सात संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया था। इनमें से देवास और धार संयंत्र ही काम शुरू कर पाए थे कि फैसला बदल दिया गया।

 

अब छोटे समूह बनाकर नीलाम होंगी रेत खदानें

सरकार ने करीब पौने दो साल बाद जिला स्तर पर समूह बनाकर रेत खदानें नीलाम करने का कमल नाथ सरकार का फैसला भी पलट दिया है। कैबिनेट ने रेत नीति 2019 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। जिन जिलों में अधिक मात्रा में रेत है, वहां एक से अधिक समूह (छोटे समूह) बनाकर खदानें नीलाम की जाएंगी। इतना ही नहीं, सरकार ई-टेंडर प्रक्रिया का भी विक्रेंद्रीकरण कर रही है। यानी रेत समूह की निविदा का प्रकाशन राज्य स्तर से होगा, पर ई-टेंडर की प्रक्रिया जिला स्तर से पूरी होगी। ठेकेदारों से अनुबंध भी जिले में ही होंगे। खदानें जून 2023 तक के लिए लीज पर दी जाएंगी। वहीं रेत की प्रारंभिक आधार मूल्य (अपसेट प्राइज) 150 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये प्रति घन मीटर कर दिया है।

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12 सड़कों पर व्यावसायिक वाहनों से वसूला जाएगा टोल टैक्स

कैबिनेट ने प्रदेश की 12 सड़कों पर टोल टैक्स लगाने का निर्णय लिया है। इन सड़कों पर सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से टैक्स लिया जाएगा। जबकि कार, जीप, ट्रैक्टर, तीन पहिया वाहन सहित टैक्स की छूट की श्रेणी में शामिल सभी वाहनों को टैक्स नहीं देना होगा। इन सड़कों में भोपाल-बैरसिया-सिरोंज, सिवनी-कटंगी, नागदा-धार, जबलपुर-पाटन-शाहपुरा, नीमच-मनासा, शुजालपुर-अकोदिया, गंजबासौदा-सिरोंज, बालाघाट-बैहर, खंडवा-मूंदी, इंदौर-देपालपुर, बुढ़ार-अमरकंटक और आगर-जावरा मार्ग शामिल हैं।

 

3.83 लाख टन धान बेचेगी सरकार

कैबिनेट ने केंद्रीय पूल में मान्य न होने के कारण मप्र स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन और मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ की गोदामों में रखी तीन लाख 83 हजार 250 टन धान बेचने का निर्णय लिया है। इसमें खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 की 3.82 लाख टन और खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 की 1250 टन धान शामिल है।मिलिंग के लिए रखी यह धान ई-निविदा के माध्यम से बेची जाएगी। धान बेचने, प्रारंभिक मूल्य तय करने, निविदा प्रक्रिया निर्धारित करने और नीलामी में प्राप्त दरों के अनुमोदन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।

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