PM AWAS YOJANA में कितनी रिश्वत लेना है, इन महिला विधायक ने समझाया

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भोपाल। हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया था कि यदि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में किसी ने एक रुपए की भी रिश्वत मांगी तो खटिया खड़ी कर दूंगा। लोकायुक्त पुलिस ने ऐसे ही कई मामलों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है लेकिन मध्य प्रदेश की लेडी सिंघम विधायक श्रीमती रामबाई परिहार ने रिश्वत लेने वाले कर्मचारियों को बुलाकर समझाया कि ऐसी योजनाओं में कितनी रिश्वत ली जानी चाहिए।

 

ग्रामीण रिश्वतखोर पंचायत सचिव और सहायक की शिकायत करने आए थे

मध्य प्रदेश की पथरिया विधानसभा से विधायक श्रीमती रामबाई परिहार के पास कुछ दिन पहले सतऊआ गांव के लोग रोजगार सहायक और सचिव की शिकायत लेकर पहुंचे थे। आरोप था कि PM आवास के नाम पर दोनों हजारों रुपए वसूल रहे हैं। इसके बाद विधायक रविवार शाम सतऊआ पहुंचीं और जनचौपाल लगाई। इसमें रोजगार सहायक निरंजन तिवारी और सचिव नारायण चौबे को भी बुलाया गया।

महिला विधायक ने बताया- पीएम आवास में ₹1000 तक रिश्वत पर कोई आपत्ति नहीं

ग्रामीणों ने विधायक के सामने ही सहायक और सचिव पर वसूली के आरोप लगाए। किसी ने 5 हजार, किसी ने 8 हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक लेने की बात कही। शिकायत सुन विधायक ने कहा कि थोड़ा बहुत तो चलता है, लेकिन हजारों रुपए किसी गरीब से ले लेना गलत है। यदि एक हजार रुपए भी ले लेते तो कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन सवा लाख के घर में 5 से 10 हजार (रिश्वत) लेना बहुत गलत है।

रिश्वतखोर कर्मचारियों को समझाया, इतनी ज्यादा मत लिया करो

विधायक ने रोजगार सहायक से कहा कि यदि तुम्हारी बात की जाए तो तुम्हारे घर में 1 लाख रुपए का बाथरूम बना होगा और यहां गरीब सवा लाख में अपना पूरा घर बना रहे हैं। इसके बाद भी यदि आप उनसे 5 से 10 हजार लेंगे तो शर्म आनी चाहिए।

शिकायत करने वाले ग्रामीणों को डांट दिया

महिला विधायक ने ग्रामीणों की शिकायत पर कोई नोटशीट नहीं बनाई बल्कि उनका कहना था कि कुछ गलती तो ग्रामीणों की भी है। उन्हें जानकारी नहीं होती और बस शिकायत करने लगते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए विधायक श्रीमती रामबाई परिहार ने कहा कि कर्मचारियों से पैसे लेने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों के पैसे वापस करने के लिए रोजगार सहायक और सचिव से कह दिया है।

रिश्वतखोरी का समर्थन करने वाले विधायकों पर क्या कार्रवाई होगी

रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों को लोकायुक्त द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता है। रिश्वत की पेशकश करने वाले आम नागरिकों के खिलाफ भी कड़े दंड का प्रावधान है परंतु सवाल यह है कि इस तरह गांव में चौपाल लगाकर रिश्वतखोरी का समर्थन करने वाले विधायकों पर कार्यवाही का क्या प्रावधान बनाया गया है। क्या ऐसे विधायकों की सदस्यता निलंबित नहीं कर दी जानी चाहिए। क्या दोष प्रमाणित होने पर ऐसे विधायकों की सदस्यता शून्य घोषित नहीं कर दी जानी चाहिए। क्या ऐसे विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के विरुद्ध गठित विशेष न्यायालय में मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए।

 

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