CIIS 2021: डार्क वेब पर अवैध गतिविधियां और क्रिप्टो करेंसी का चलन

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CIIS 2021: भोपाल। डार्क वेब पर संचालित होने वाली अवैध गतिविधियां पहले से ही साइबर अपराध के रूप में बड़ा खतरा थीं, लेकिन अब क्रिप्टो करेंसी (आभासी मुद्रा) के लेन देन ने इसे और भयावह कर दिया है।

डार्क वेब पर हथियारों की बिक्री, नशीले पदार्थ सहित कई अवैध कारोबार संचालित हो रहे हैं। पहले किसी देश की मुद्रा के तौर पर भुगतान करने के दौरान अपराधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आ जाते थे।

अब क्रिप्टो करेंसी के जरिये भुगतान किया जा रहा है। सभी देश इस समस्या से निपटने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन अभी तक बहुत कारगर उपाय सामने नहीं आ सके हैं।

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मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा आयोजित साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड इंटेलिजेंस समिट 2021 में भी इस विषय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने विमर्श किया गया और जानकारियां साझा कीं। मालूम हो, डार्क वेब इंटरनेट की दुनिया में वह व्यवस्था होती है, जहां सर्च इंजन का दखल नहीं है और एक अलग व्यवस्था के तहत अवैध कारोबार फल-फूल रहे हैं।

 

इस तरह से काम कर रहा है रैकेट

आमतौर पर लोग साधारण काम के लिए जिस ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें सरफेस वेब कहा जाता है, जबकि गैरकानूनी कार्यों के लिए डार्क वेब का इस्तेमाल करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में डार्क वेब के जरिये होने वाली अवैध गतिविधियों को पकड़ा गया है। सूत्रों के अनुसार, यह गतिविधियां तब पकड़ में आई थीं, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश की प्रचलित मुद्रा में लेनदेन किया गया। अब क्रिप्टो करेंसी (आभासी मुद्रा) बाजार में है और इसका एक्सचेंज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है। अपराधी अवैध हथियारों, पोर्नोग्राफी, ड्रग्स आदि की खरीदी के लिए इसी मुद्रा में भुगतान कर रहे हैं। इससे जांच एजेंसियों की मशक्कत कई गुना बढ़ गई है।

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डार्क वेब के जरिये डेटा चोरी भी किया जाता है : शोभित चतुर्वेदी साइबर विशेषज्ञ शोभित चतुर्वेदी ने बताया कि डार्क वेब की वेबसाइट को टार एन्क्रिप्शन टूल की सहायता से छुपा दिया जाता है, जिससे इन तक सामान्य सर्च इंजन से नहीं पहुंचा जा सकता। यह अवैध गतिविधियों के बड़े बाजार की तरह है। इसके माध्यम से डेटा भी चोरी किया जाता है।

डार्क वेब पर अवैध गतिविधियों का संचालन काफी ज्यादा होता है। जांच एजेंसियां लगातार इन पर नजर रख रही है। हालांकि चुनौती काफी बड़ी है।– जितेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, साइबर सेल, इंदौर

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