मेरा हश्र नरेंद्र गिरि से भी बुरा हो सकता है’, प्रयागराज मठ के महंत की मौत के बाद डर के साए में जी रहे बोधगया मठ के महंत रमेश गिरि

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प्रयागराज में महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Narendra Giri Death) के बाद उनके करीबी महंत काफी डरे हुए हैं।

बिहार के बोधगया मठ के महंत रमेश गिरि (Bodhgaya Math Mahant Ramesh Giri) महाराज इन दिनों वाराणसी में शरण लिए हुए हैं. नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के बाद वह काफी दहशत में हैं. महंत रमेश गिरि का कहना है कि उनका हश्र नरेंद्र गिरि से भी बुरा हो सकता है।

दरअसल बोधगया मठ में चल रहे विवाद की वजह से महंत रमेश गिरि इन दिनों वाराणसी में शरण लिए हुए हैं. अब उन्हें भी जान का खतरा सताने लगा है।

महंत रमेश गिरि ने नरेंद्र गिरि को लखनऊ के काली मंदिर मठ का अध्यक्ष नियुक्त किया था. इसके बाद विवादों से निकलने में नरेंद्र गिरि (Narendra Giri) ने कई बार उनकी मदद की थी।

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अब नरेंद्र गिरि की मौत के बाद महंत रमेश गिरि को भी डर सताने लगा है वह अब खुद को बहुत ही असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने यूपी और बिहार सरकार से अपनी सुरक्षा (Ramesh Giri Demand Security) की गुहार लगाई है।

 

बोधगया मठ के महंत ने मांगी सुरक्षा

बता दें कि बोधगया मठ की संपत्ति बिहार के साथ ही वाराणसी समेत अलग-अलग जगहों पर है. फिलहाल वह यहां पर ही शरण लिए हुए हैं. प्रयागराज मठ के महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के बाद अब रमेश गिरि को अपनी जान का खतरा सताने लगा है. बोधगया मठ के महंत का कहना है कि नरेंद्र गिरि उनके बड़े सहयोगी थे. लखनऊ के काली पीठ मठ मामले में भी उन्होंने उनकी बहुत मदद की थी. इसके बाद नरेंद्र गिरि काली मंदिर मठ के अध्यक्ष बना दिए गए थे. अब उनकी मौत के बाद रमेश गिरि वहुत ही तकलीफ में हैं. उनका कहना है कि अगर नरेंद्र गिरि आज जिंदा होते तो वह बोधगया मठ विवाद मामले में उनकी मदद जरूर करते.

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नरेंद्र गिरि की मौत के बाद जताया जान का खतरा

रमेश गिरि ने बताया कि इसी नवरात्रि में नरेंद्र गिरि बोधगया मठ जाकर विवाद को लेकर चर्चा करने वाले थे. उनका आरोप है कि बोधगया मठ में बहुत से लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं. उन लोगों ने उनके मठ पर कब्जा कर लिया है. अब तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है.नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अब महंत रमेश गिरि ने बिहार सरकार से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है.

रमेश गिरि का कहना है कि बोधगया मठ में उनेक एकर करीबी की जान खतरे में थी. अब उनकी जान को भी वहां पर खतरा है. इसीलिए उन्होंने वाराणसी मठ में शरण ली हुई है. उनका कहना है कि अगर उन्हें अब सुरक्षा नहीं दी गई तो उनका हश्र नरेंद्र गिरि से भी बुरा हो सकता है.

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