सरकार का बड़ा कदम: भारत में सीधे फंड भेजने से नौ विदेशी NGOs को रोका, पढ़ें आखिर क्यों लिया गया ये फैसला

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भारत में विभिन्न क्षेत्रों में काम के लिए धन मुहैया करा रहे कम से कम नौ विदेशी गैर सरकारी संगठनों (NGO) को सरकार ने संबंधित अधिकारियों से बिना अनुमति के देश में फंड भेजने से रोक दिया. गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम 2010 के प्रावधानों के तहत इन गैर सरकारी संगठनों को ‘पूर्व संदर्भ श्रेणी’ में रखा है और इन विदेशी संस्थाओं से धन आने की सूचना संबंधित अधिकारियों को देना बैंकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि इन एनजीओ में से तीन अमेरिका के हैं, दो ऑस्ट्रेलिया के हैं और चार ब्रिटेन के हैं. उन्होंने बताया कि ये गैर सरकारी संगठन ज्यादातर पर्यावरण के मुद्दों से संबंधित कार्य के लिए धन भेजते हैं.

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इनमें अमेरिकी संस्थाएं ओमिडयार नेटवर्क शामिल हैं, जो ई-बे के संस्थापक पियरे ओमिडयार द्वारा समर्थित हैं और भारत, स्टारडस्ट और ह्यूमैनिटी यूनाइटेड के क्षेत्रों में सामाजिक प्रभाव फंडिंग में शामिल हैं. इनमें यूरोपीय जलवायु फाउंडेशन; यूके स्थित फ्रीडम फंड, चिल्ड्रन इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन, लॉड्स फाउंडेशन और लेगाटम फंड; ऑस्ट्रेलिया स्थित वॉक फ्री फाउंडेशन (WFF), और मिंडेरू हैं. इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सभी बैंकों को 1 जुलाई को एक सर्कुलर भेजा गया था.

गृहमंत्रालय को बताना जरूरी

आरबीआई ने निर्देश दिया है कि इन दाता एजेंसियों से भारत में किसी भी गैर सरकारी संगठन / स्वैच्छिक संगठनों / संघों / व्यक्ति (व्यक्तियों) के लिए किसी भी फंड के प्रवाह को गृह मंत्रालय के ध्यान में लाया जाना चाहिए, जिससे फंड को खातों में जमा करने की अनुमति दी जा सके. सर्कुलर के मुताबिक बिना मंजूरी के इस तरह के फंड को खातों में जमा नहीं किया जा सकता. बहुत सारे ऑडिट जो कोविड -19 के कारण लंबित थे उन्हें पूरा करा लिया गया है. कंपनियों ने एफसीआरए (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) दस्तावेजों में लिखित कार्यों के अलावा अन्य काम में फंड भेजा है, उन्हें पूर्व संदर्भ श्रेणी के तहत रखा गया है. यह एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है.

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नियमों में की गई सख्ती

पिछले कुछ सालों में सरकार ने ग्रीनपीस, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, कम्पैशन इंटरनेशनल और ओपन सोसाइटी फाउंडेशन सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है. एमनेस्टी और ग्रीनपीस ने भारत में अपना ऑपरेशन भी बंद कर दिया है. एफसीआरए के नियमों को सितंबर में और कड़ा कर दिया गया है. अब विशिष्ट धार्मिक, शैक्षिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ किसी भी संबंध को विदेशी योगदान प्राप्त करने या उपयोग करने से पहले एमएचए से एफसीआरए पंजीकरण या पूर्व संदर्भ की जरूरत होती है.

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