Ramcharitra Manas Inxluded In Mp College Education : मध्य प्रदेश के कालेजों में स्नातक के प्रथम वर्ष में पढ़ाई जाएगी रामचरितमानस

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Ramcharitra Manas Inxluded In Mp College Education भोपाल । प्रदेश के कालेजों में स्नातक स्तर से अब रामचरितमानस पढ़ाई जाएगी। इसमें भगवान श्री राम, हनुमान जी और तुलसीदास जी की जीवनी श्ाामिल रहेगी। स्नातक के प्रथम वर्ष में इसी साल से ‘रामचरितमानस का व्यावहारिक दर्शन” वैकल्पिक विषय के तौर पर शामिल किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसका सिलेबस तैयार कर लिया है।

इसका 100 नंबर का पेपर रहेगा। इसे दर्शन शास्त्र विषय में रखा गया है। यह सभी के लिए अनिवार्य न होकर वैकल्पिक रहेगा।

यह बात उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से चर्चा में कही।

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उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सभी विषयों का समावेश किया गया है। विद्यार्थियों को भगवान राम, हनुमान व तुलसीदास जी की जीवनी पढ़ाई जाएगी।

ये विषय हिंदी और दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर पढ़ाएंगे, यानी जहां सिर्फ हिंदी के प्रोफेसर हैं तो वहां वे यह विषय पढ़ाएंगे। वहीं, जिन कालेजों में दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर हैं वहां वही ये विषय पढ़ाएंगे। इसे इसी सत्र यानी 2021-2022 में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में प्रदेश के कालेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में नए पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। इसमें महाभारत, रामचरितमानस, योग और ध्यान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के फाउंडेशन कोर्स में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को सी राजगोपालाचारी की महाभारत की प्रस्तावना पढ़ाई जाएगी। अंग्रेजी और हिंदी के अलावा, योग और ध्यान को भी तीसरे फाउंडेशन कोर्स के रूप में शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को न्ौतिक और धार्मिक शिक्षा से जोड़ा जाएगा, ताकि वे संस्कारों और संस्कृत से जुड़ सकें।

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यह विषय पढ़ाने का यह है उद्देश्य

मंत्री ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य है कि पढ़ाई के बाद विद्यार्थी के व्यक्तित्व विकास के विभिन्न् आयामों पर केंद्रित होकर संतुलित नेतृत्व क्षमता व मानवतावादी दृष्टिकोण को विकसित कर उन्हें योग्य बनाया जाए। विद्यार्थी उन जीवन मूल्यों को भी जान सकें, जिसकी समाज में आज जरूरत है। विद्यार्थी तनाव प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में प्रेरक कुशल वक्ता बन सकें।

 

 

 

 

 

 

 

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