Forest Department News: वन विभाग के नाक के नीचे राष्ट्रीय वन उपज की तस्करी, धड़ल्ले से काटे जा रहे पेड़

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नीमच। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री पेड़ लगा कर प्रकृति को बचाने का संदेश दे रहे हैं, कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा पेड़-पौधे लगाने का अभियान चलाया जा रहा है, वन विभाग खुद जंगलों में पौधारोपण करवा रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर तस्करों के द्वारा जंगलों से राष्ट्रीय वन उपज काटी जा रही है।

नीमच जिले के वन विभाग के अंतर्गत आने वाली जावद रेंज की जाट सब रेंज के जंगलों में राष्ट्रीय वन उपज खैर के पेड़ों को तस्करो के द्वारा लगातार काटा जा रहे है। धड़ल्ले से इन पेड़ों को काट कर राजस्थान की ओर तस्करी की जा रही है।

आपको बता दें, इस बेशकीमती पेड़ की लकड़ी से कत्था बनाने का काम होता है। इसकी कीमत 20 से 25 हज़ार रुपये क्विंटल में स्थानीय तस्करों द्वारा राजस्थान के तस्करों को बेची जा रही है।

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मिली जानकारी के अनुसार ये लकड़ी राजस्थान से दिल्ली तक जाती है और वहाँ से अन्य राज्यों में पहुँचाई  जा रही है। वन विभाग की नाक के नीचे से ये पेड़ काटे जा रहे है। लेकिन अब तक किसी ने यहां कार्रवाई करने की ज़हमत नहीं उठाई।

इस तरह जंगल का काटे जाना कहीं ना कहीं वन विभाग की मिलीभगत को उजागर कर रहा है। ये मामला जाट सब रेंज के रिज़र्व फारेस्ट का है जहां धड़ल्ले से लगभग 40 खैर के पेड़ एक साथ तस्करों ने काट दिए हैं। उनमें से कुछ पुराने कटे हुए पेड़ों की हेमरिंग वन विभाग द्वारा की गई है।

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सिर्फ हैमर करके कटे हुए पेड़ो के अवशेषों को छोड़ दिया गया है।  मगर पेड़ किसने काटे और कौन इन सब के पीछे है उसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। यहां पुराने पेड़ों के साथ कुछ नए कटे हुए ताज़ा अवशेष मौजूद है।

यहां कई इलाकों में बड़े पैमाने पर जंगल मे पेड़ काटे गए हैं, मगर वन विभाग आंखे बंद करके तमाशबीन बना हुआ है। यहाँ के जंगल के रखवालों के होते हुए भी अवैध रुप से गोरखधंधा फल फूल रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों ने अब तक इन तस्करों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है।

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तस्करी सूत्रों के मुताबिक रात के समय ये तस्कर वाहनों मे लकड़ी भरकर राजस्थान की ओर निकल जाते है।

अब सवाल ये है कि जब वन विभाग के कर्मचारी रात मे गश्त करते है तो इन तस्करो के वाहन क्यों हाथ नहीं लगते। इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं तो अब तक वन विभाग ने इस मामले मे कोई कार्रवाई क्यों नहीं।

अब देखना ये है कि वन विभाग ये मामला उजागर होने के बाद कितने तस्करों पर कार्रवाई करता है या फिर इस मामले को अज्ञात तस्करों के द्वारा काटा जाना बताकर लीपापोती की जाएगी।

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