एक ट्वीट पर रेल मंत्रालय तक हड़कंप

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कटनी। सोशल मीडिया का प्लेटफार्म अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने आम जनता के लिए सुलभ साधन बन गया है। ट्विटर फेसबुक व्हाटसप पर की जाने वाली शिकायतें सीधे उच्चाधिकारियों तक पहुंच जाती हैं खास तौर पर रेलवे ने अपने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म को काफी मजबूत किया है, जिसने स्थानीय अधिकारियों की नाक में दम कर रखा है। इधर युवा भी अब जागरूक हो चला लिहाजा किसी भी मसले पर शिकायत करने में वह भी पीछे नहीं।

इसी का उदाहरण कल देखने को मिला जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र सम्मलेन में शामिल होने कटनी बीना पैसेंजर से करीब 1 दर्जन विधार्थी परिषद के कार्यकर्ता सागर रवाना हुए। इसी बीच किसी बुजुर्ग यात्री को ट्रेन में पानी की जरूरत पड़ी।

परिषद के कार्यकर्ताओ ने हरदुआ स्टेशन में ट्रेन खड़ी होने के बाद स्टेशन में उतर कर इस यात्री की मदद करने पानी तलाशा लेकिन उन्हें प्लेटफार्म पर पानी नहीं मिला। बस फिर क्या था ट्रेन तो रवाना हो गई मगर मय फोटो परिषद के नगर मंत्री अनुनय शुक्ला ने अपने ट्विटर अकाउंट से रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा पीएमओ तक शिकायत कर डाली। करीब 15 मिनट में दिल्ली से जबलपुर तक हड़कम्प मच गया।

आनन फानन इस ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए मंत्रालय ने जबलपुर जीएम और डीआरएम से जवाब-तलब किया। कटनी से टीम दौड़ी और हरदुआ स्टेशन में पानी नहीं है, इस बात की जानकारी से रेल मंत्रालय को अवगत कराया गया, हालांकि डीआरएम जबलपुर ने कारण यह बताया कि पाइप लाइन टूटने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई, जबकि स्थानीय लोगों का कहना था कि कटनी से रीठी, दमोह तक अधिकांश स्टेशनों में पेयजल की व्यवस्था सुचारू नहीं है।

बहरहाल आज सिर्फ हरदुआ ही नहीं इस रूट के सभी स्टेशनों में पेयजल व्यवस्था सुचारू करने रेलवे की टीम इधर उधर भागती नजर आई। कुल मिलाकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म जिम्मदारों की नाकामी से पर्दा हटाने का बेहतरीन साधन बन गया है। लेकिन यह भी जरूरी है कि इसका सदुपयोग भी किया जाए, जैसा परिषद के कार्यकर्ता ने किया। आज दिनभर इस ट्वीट की चर्चा चलती रही।

इसी रूट का निरीक्ष किया था डीआरएम ने
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मंडल रेल प्रबंधक मनोज सिंह ने विगत दिवस कटनी बीना रेल लाइन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वे किन समस्याओं से अवगत हुए और निरीक्षण में उन्हें क्या खामियां मिली, यह तो मालूम नहीं लेकिन एक बात तो तय है कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के इस तरह के निरीक्षण केवल औपचारिक बनकर रह गए हैं।

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