अफगानिस्तान में स्थानीय लोगों ने झंडा लहराते हुए किया प्रदर्शन, तालिबान की गोलीबारी में कई की मौत

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अफगानिस्तान का भविष्य अब तालिबान के हाथों लिखा जाना हैं। दो दशक से सत्ता से दूर रहने के बाद तालिबान अफगान पर काबिज हो चुका है। तालिबान द्वारा देश पर अपना अधिकार करने पर स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।

काबुल, रायटर। अफगानिस्तान का भविष्य अब तालिबान के हाथों लिखा जाना हैं। दो दशक से सत्ता से दूर रहने के बाद तालिबान अफगान पर काबिज हो चुका है। तालिबान द्वारा देश पर अपना अधिकार करने पर स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। मगर, तालिबान लड़ाकों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की जा रही हैं।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि गुरुवार को अफगान के कई शहरों में स्थानीय लोगों ने झंडा लहराते हुए प्रदर्शन किया और तालिबान लड़ाकों ने भीड़ पर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई, जिसमें कई लोग मारे गए। राजधानी पर कब्जा होने के बाद से आतंकवादियों के खिलाफ यह पहला विरोध हैं।

सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो क्लिप में दिखा गया कि काबुल में पुरुषों और कुछ महिलाओं की भीड़ ने काले, लाल और हरे रंग के राष्ट्रीय झंडे लहराए। एक महिला अपने कंधों पर झंडा लपेटकर चल रही थी। अफगानिस्तान 1919 अगस्त को ब्रिटिश नियंत्रण से अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाता है।

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प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद सलीम ने कहा कि कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद में एक रैली के दौरान कई लोगों की मौत हो गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह गोलीबारी हुई है या भगदड़ की वजह से। मोहम्मद सलीम ने बताया कि वह इस प्रदर्शन में शामिल होने से डर रहा था, मगर जब उसने अपने पड़ोसी को इसमें शामिल होता देखा तो वह भी इसमें शामिल हो गया। तालिबान द्वारा भगदड़ और गोलीबारी में कई लोग मारे गए और घायल हो गए।

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प्रदर्शनकारियों ने पूर्वी शहर जलालाबाद और पक्तिया प्रांत के एक जिले की सड़कों पर भी प्रदर्शन किया। प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया ने बताया कि बुधवार को तालिबान उग्रवादियों ने जलालाबाद में झंडा लहरा रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें तीन की मौत हो गई। मीडिया के मुताबिक, कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने तालिबान के सफेद झंडे फाड़ दिए। साथ ही बुधवार को असदाबाद और एक अन्य पूर्वी शहर खोस्त में भी इसी तरह की घटना देखने को मिली थी।

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तालिबान के विरोध में रैली करने की कोशिश करने वालों को उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने अपना समर्थन दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि राष्ट्रीय ध्वज को लहराने और इस तरह राष्ट्र की गरिमा के लिए खड़े होने वालों को सलाम।

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