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लॉकरों से संबंध में रखनी होगी पारदर्शिता

RBI के निर्देश में कहा गया है कि बैंकों को लॉकर आवंटन के सभी आवेदनों के लिए रिसीट देनी होगी। बैंकों के लिए लॉकर ऑपरेशंस का एसएमएस (SMS) और ईमेल (e-mail) कस्टमर्स को भेजना जरूरी होगा। सभी ग्राहकों से लॉकर की एप्लीकेशन ली जाएगी और उन्हें वेट लिस्ट नंबर जारी किया जाएगा। बैंकों के ब्रांच वाइज लॉकर एलॉटमेंट की जानकारी और वेटिंग लिस्ट, कोर बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

गैर-कानूनी सामान पर लगेगी रोक

बैंकों को लॉकर करार में एक प्रावधान शामिल करना होगा जिसके तहत किराए पर लॉकर लेने वाला व्यक्ति उसमें कोई भी गैरकानूनी या खतरनाक सामान नहीं रख सकेगा। बैंक को गैरकानूनी या खतरनाक (विस्फोटक, ज्वलनशील) वस्तु पर शक होने पर एक्शन लेने का अधिकार होगा।

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लोगों को मिलेगी बेहतर सुविधा

नए नियम के मुताबिक केवाईसी (KYC) के बाद गैर-बैंकिंग ग्राहकों को भी बैंक लॉकर की सुविधा मिल सकेगी, लेकिन यह बैंक पर निर्भर करेगा। लॉकर से जुड़ा एग्रीमेंट, बैंक और ग्राहक के बीच में स्टांप के जरिए होगा। बैंक ग्राहक को सूचना देने के बाद ही लॉकर की शिफ्टिंग एक जगह से दूसरी जगह कर सकेंगे। लॉकर के किराए के रूप में टर्म डिपॉजिट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

रिजर्व बैंक ने कहा कि उसने बैंकिंग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में विभिन्न घटनाक्रमों, उपभोक्ता शिकायत की प्रकृति और बैंकों और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर ‘बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली जमा लॉकर/सुरक्षित अभिरक्षा सामान सुविधा’ की समीक्षा की है।