नर्सिंग होम एक्ट में खामी का फायदा उठाकर एक डॉक्टर के नाम से चल रहे कई अस्पताल

Advertisements

भोपाल। एक रेसीडेंट डॉक्टरों के नाम कई अस्पतालों में होने के पीछे सबसे बड़ी खामी नर्सिंग होम्स एक्ट की है। एक्ट में उल्लेख ही नहीं है कि एक रेजीडेंट डॉक्टर का नाम कितने अस्पतालों में हो सकता है। इसी का फायदा उठाकर एक-एक डॉक्टरों का नाम कई अस्पतालों में पंजीकृत हो गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि रेसीडेंट डॉक्टर ड्यूटी डॉक्टर होता है। उसकी आठ घंटे की ड्यूटी होती है। ऐसे में वह एक से अधिक अस्पताल में जा ही नहीं सकता। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने 20 दिन पहले मप्र मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखकर ऐसे 11 डॉक्टरों की जानकारी दी है, जिनके नाम तीन से लेकर 13 अस्पतालों में रेसीडेंट डॉक्टर के तौर पर दर्ज है।

इसे भी पढ़ें-  Lokayukta Raid: लोकायुक्‍त टीम ने पंचायत समन्वयक अधिकारी ओमप्रकाश राठौर को रिश्‍वत लेते पकड़ा

इस पत्र के संदर्भ में मेडिकल काउंसिल ने संबंधित डॉक्टरों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। हालांकि, अभी किसी भी डॉक्टर ने काउंसिल को जवाब नहीं भेजा है। काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टरों के साथ ही उन अस्पतालों से भी पक्ष लिया जाएगा, जहां डॉक्टरों का नाम पंजीकृत है। इसके बाद साबित होता है कि डॉक्टर ने गलत जानकारी दी है तो कार्रवाई हो सकती है। इसमें डॉक्टरों का पंजीयन निलंबित किया जा सकता है। हांलाकि, इसके पहले डॉक्टरों को काउंसिल में बुलाकर सुनवाई की जाएगी।

इस संदर्भ में भोपाल नर्सिंग होम्‍स एसोसिएशन के एक कार्यसमिति सदस्‍य का कहना है कि कोई डॉक्टर एक से अधिक अस्पताल में रेसीडेंट डॉक्टर के तौर पर पंजीकृत है तो यह वैधानिक और व्यवहारिक दोनों लिहाज से गलत है। हालांकि, कई बार डॉक्टर अस्पताल छोड़ देते हैं, लेकिन उनका नाम नहीं हटता, जिससे यह गफलत होती है।
बंद हो सकते हैं और निजी अस्पताल

इसे भी पढ़ें-  MP Teachers News: चयनित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हलचल तेज

भोपाल में 140 निजी अस्पताल पिछले साल मार्च से लेकर इस साल अप्रैल के बीच खुले हैं। इनमें कई अस्पताल अपने आप बंद भी हो गए हैं। 10 अस्पतालों को सीएमएचओ डॉ.प्रभाकर तिवारी ने बंद करा दिया है। डॉ. तिवारी ने बताया कि 46 निजी अस्पतालों के निरीक्षण के बाद 23 में कमियां मिली थीं। इन्हें नोटिस दिया गया था। इनमें 10 को संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बंद करा दिया है। कुछ अस्पतालों का जवाब आना अभी बाकी है। सब ठीक नहीं रहा, तो इन्हें भी बंद करने का आदेश दिया जाएगा।

नर्सिंग होम एक्ट में यह नहीं लिखा है कि एक डॉक्टर कितने अस्पताल में जा सकता है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर एक रेसीडेंट डॉक्टर एक से अधिक जगह ड्यूटी नहीं कर सकता। अगर से एक ज्यादा अस्पतालों में नाम दर्ज है तो यह गलत है।
– डॉ. केके ठस्सू, पूर्व संचालक, स्वास्थ्य विभाग

Advertisements