Shanishchari Amavasya 2021: शनिचरी अमावस्या पर त्रेता युगीन शनि मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे भक्त

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Shanishchari Amavasya 2021: ऐंती गांव स्थित त्रेता युगीन शनिदेव मंदिर पर हर शनिश्चरी अमावस्या पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार प्रशासन ने क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में मेला और भंडारों पर प्रतिबंध लगाया था। जिसके चलते शनिवार को मंदिर पर मेला का तो आयोजन नहीं हुआ, लेकिन शनिश्चरी अमावस्या होने पर लोग अपने निजी वाहनों से दर्शनों के लिए पहुंचे। प्रशासन ने दर्शनार्थियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए यहां पर्याप्त इंतजाम पहले से ही कर रखे थे। महज जिस तरह मेले का प्रचार किया जाता है, वह इस बार नहीं किया गया। जिससे मेला में भीड़ जमा ना हो जाए।

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शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या होने पर लोग शनिदेव के दर्शनों के लिए पहुंचे, लेकिन इस बार मेला का प्रचार प्रसार न करते हुए इस पर प्रतिबंध लगाया गया था। जिस पर यहां महज दर्शनों की ही व्यवस्था रखी गई थी। यहां बता दें कि शनिचरी अमावस्या पर शनि देव मंदिर पर हर साल विशाल मेला लगाया जाता है। जिसमें लगभग दो से तीन लाख लोग देश भर से पहुंचते हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर क्षेत्र में 2 दिन पहले से ही भंडारों का आयोजन शुरू हो जाता है। इस बार क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में इन भंडारों और मेला पर प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि अमावस्या को देखते हुए मंदिर परिसर की पूरी तरह से मेला की तरह ही सजावट की गई थी। इसके साथ ही प्रशासन ने सभी विभागों के अधिकारियों काे व्यवस्था में लगाया। इसकी वजह है कि भले ही मेला आयोजन ना हुआ हो, लेकिन अमावस्या के चलते दर्शनार्थी अपने निजी वाहनों से यहां पहुंचते हैं, हुआ भी ऐसा। लोग शनिदेव के दर्शनों के लिए सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए। हालांकि इस दौरान केवल दर्शनों की ही व्यवस्था थी, जिससे बेहद कम संख्या में भीड़ यहां दिखाई दी।

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अपने घर से ही सरसों का तेल लेकर पहुंचे लोग: शनि देव मंदिर पर शनिश्चरी अमावस्या पर मेला आयोजित किया जाता था। जहां सबसे ज्यादा पैक सरसों के तेल की दुकान लगाई जाती थी। लाखों की संख्या में लोग यहां पहुंचते थे, जो यहीं से पैक सरसों का तेल खरीद कर शनिदेव पर चढ़ाते थे। इस बार मेला का आयोजन नहीं हुआ तो यहां कोई दुकान भी नहीं लगाई गई। जिसको देखते हुए लोग अपने घरों से ही सरसों का तेल लेकर पहुंचे। जहां शनि देव को चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगी।

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