Madhya Pradesh News: पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र पर खनिज पट्टा देगी सरकार, नियम किए जाएंगे शिथिल

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Madhya Pradesh News: भोपाल। प्रदेश में खनिज उत्खनन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र पर खनिज पट्टा देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए खनिज नियमों को शिथिल किया जाएगा। शुक्रवार को केंद्रीय खनिज मंत्री प्रहलाद जोशी और राज्यमंत्री राव साहब दानवे से खनिज प्रबंधन पर वर्चुअल चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह संकेत दिए हैं। चौहान ने केंद्रीय मंत्रियों को भरोसा दिलाया कि वर्ष 2022 तक प्रदेश में सौ से अधिक खनिज ब्लाक की नीलामी के प्रयास होंगे। साथ ही उन्होंने छतरपुर के मडदेवरा रॉक फॉस्फेट ब्लाक में यूरेनियम की संभावना को देखते हुए एटामिक मिनरल डिवीजन की रोक पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।

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केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्य खनिजों की 2014 से अधिसूचित रायल्टी दरों के पुनर्निर्धारण के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आज इसकी जरूरत है। वहीं चौहान ने प्रदेश में खनिज ब्लाकों की खोज-नीलामी प्रक्रिया में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण तथा एमइसीएल से तकनीकी सहयोग मांगा। उन्होंने भोपाल में भारतीय खान ब्यूरो का कार्यालय शुरू करने, उर्वरक उत्पादन के लिए उपयोगी ग्लोकोनाइट खनिज का औसत मूल्य निर्धारित करने का भी अनुरोध किया। बैठक में मॉयल (मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड) की मांग पर बालाघाट व छिंदवाड़ा जिलों में 1961 से आरक्षित क्षेत्रों को अनारक्षित करने पर चर्चा हुई।

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खनिज ब्लाक की नीलामी में तेजी लाएं

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए खनिज क्षेत्र में प्रक्रियाओं का सरलीकरण कर खनिज ब्लाक नीलामी में तेजी लाएं। केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में ब्लाक की नीलामी गतिविधियों पर संतोष जताते हुए समय सारणी तय कर अगली नीलामी प्रक्रिया संचालित करने को कहा।

प्रदेश में कोल गैसीफिकेशन की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोयले का प्रचुर भंडार है। यहां कोयला खनन भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां करती हैं। कंपनियों को कोल गैसीफिकेशन (गैस में परिवर्तन) और लिक्विडिफिकेशन (पिघलाने) के निर्देश दिए जाएं। इससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के स्रोत को समृद्ध करने में मदद मिलेगी। चौहान ने बताया कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण बैतूल और छतरपुर जिले में दुर्लभ खनिजों की खोज कर रहा है, जो समयसीमा में पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने चूना पत्थर की रॉयल्टी दरों को पुनरीक्षित करने का अनुरोध भी किया।

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4446 करोड़ रुपये का राजस्व

प्रदेश में मुख्य खनिज की 831 खदानों से वर्ष 2020-21 में 2908 करोड़ रुपये और गौण खनिज की 6338 खदानों से 1538 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। आने वाले सालों में नीलाम होने वाले खनिज ब्लाक से 50 साल तक लगभग 30 हजार करोड़ का राजस्व आने का लक्ष्य है।

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