ग्राम सभा ने कलेक्टर पर 25 लाख का जुर्माना कानून के तहत ठोका, जानिए पूरा मामला

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भोपाल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की आदिवासी ग्राम सभा ‘सेहरा (शाहपुर)’ ने जिले के कलेक्टर पर 25 लाख रुपए का जुर्माना ठोका है। मामला पुलिस की कथित प्रताड़ना से स्वस्थ होकर एक व्यक्ति द्वारा आत्महत्या कर लेने का है। ग्रामसभा का कहना है कि कलेक्टर मृत व्यक्ति की पत्नी को न्याय देने में नाकाम रहे। कलेक्टर पर यह जुर्माना मध्यप्रदेश रूढ़ि जन संहिता 1992 के तहत लगाया गया है।

मामला क्या है

महिला संगीता ने आदिवासी ग्राम सभा बुलाई थी। उसने बताया कि उसके पति सियाराम धुर्वे को हत्या के एक मामले में चिचोली थाना पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
इसके बाद उसे छोड़ दिया गया लेकिन सिर्फ पुलिस आए दिन घर में आने लगी। पुलिस वाले ₹10000 रिश्वत की मांग कर रहे थे। बार-बार पुलिस के घर आने के कारण तनाव में आए सियाराम धुर्वे ने जहरीली दवा का सेवन करके आत्महत्या कर ली थी।
महिला ने बताया कि दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए उसने पुलिस अधीक्षक एवं जिला प्रशासन से गुहार लगाई थी परंतु उसके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शेड्यूल डिस्ट्रिक्ट एक्ट 1874, भारत शासन अधिनियम 1935- भाग 91, 92, 311, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 भाग 7 (एबीसी), भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 5, भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1898/ 1973 अध्याय 1, पैरा दो (ख), भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 (3) कभास, अनुच्छेद 372 भास, अनुच्छेद 244 (1), अनुसूचित क्षेत्रों के शासन प्रशासन एवं मध्य प्रदेश राज्य की अनुसूचित जनजातियों की रूढ़ीजन्य संहिता 1992 के तहत कलेक्टर को दोषी माना गया एवं जुर्माना लगाया गया।

कानून की किताबें खंगाल रहे हैं विशेषज्ञ

प्रथम दृष्टया ग्राम सभा के इस फैसले को, महिला की समस्या को सबके सामने लाने की कोशिश माना गया लेकिन ग्राम सभा के फैसले में जिस प्रकार से संविधान और कानून की धाराओं का उल्लेख किया गया है उसके बाद विशेषज्ञ कानून की किताबें खंगाल रहे हैं। क्या सचमुच किसी ग्राम सभा को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कलेक्टर को जुर्माना अदा करने का आदेश जारी कर सके।
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