Mucormycosis in MP: प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मरीजों से तीन गुना ज्यादा हैं फंगस के रोगी

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Mucormycosis in MP: भोपाल । कारोना से ठीक होने के दो महीने बाद भी म्यूकरमाइकोसिस (फंगस) को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। वजह, अस्पतालों में ऐसे मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, जिन्हें मई में कोरोना का संक्रमण हुआ था और अब वह फंगस के शिकार हो रहे हैं।

प्रदेश में म्यूकरमाइकोसिस के फिलहाल 1553 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि कोरोना के सक्रिय मरीज सिर्फ 416 हैं। यानी कोरोना के सक्रिय मरीजों से तीन गुना ज्यादा सक्रिय रोगी (जिनका इलाज चल रहा) म्यूकरमाइकोसिस के हैं।

हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लोकेन्द्र दवे ने कहा कि एक तो मरीज कोरोना से उबरने के डेढ़ से दो महीने बाद फंगस की चपेट में आ रहे हैं। दूसरी बात यह कि इस बीमारी को ठीक होने में कम से कम एक महीना लगता है।

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कई मरीजों में दोबारा संक्रमण बढ़ने पर वह फिर से भर्ती हो रहे हैं। इसी वजह से कि कोरोना के सक्रिय मरीजों से कई गुना ज्यादा म्यूकरमाइकोसिस के मरीज हैं। बता दें कि भोपाल के हमीदिया में करीब 65 और एम्स में म्यूकरमाइकोसिस के 36 मरीज फिलहाल भर्ती हैं।

 

जिन्हें स्टेरायड नहीं लगा, वे भी सतर्क रहें

 

 

नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी दुबे ने बताया कि ऐसे लोग भी म्यूकरमाइकोसिस के शिकार हो रहे हैं जिन्हें कोरोना के मामूली लक्षण दिखे थे और होम आइसोलेशन में थे।
स्टेरायड भी नहीं दिया गया। इसके बाद भी डायबिटीज का स्तर बढ़ने और प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से वह म्यूकरमाइकोसिस से पीड़ित हो गए।
ऐसे लोग आंख में लालपन, जबड़े में सूजन और दर्द, नाक से गंदा पानी आना जैसी दिक्कत हो तो चिकित्सक को दिखाने में देरी न करें।
हमीदिया में अब कोरोना के सिर्फ दो मरीज
हमीदिया अस्पताल में अब कोरोना के सिर्फ दो मरीज भर्ती हैं। दोनों मरीज यहां करीब एक महीने से वेंटिलेटर पर हैं। मरीज कम होने की वजह से अस्पताल के एक-एक कर ज्यादातर वार्ड बंद कर दिए गए हैं। यह दोनों मरीज डी-ब्लाक में भर्ती हैं।

 

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