Twitter: IT नियमों को लेकर घिरी कंपनी, कोर्ट का संरक्षण से इंकार, नये मंत्री ने दिखाये सख्त तेवर

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Twitter India की मुसीबत लगातार बढ़ती जा रही है। एक तरफ दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि ट्विटर ने नियमों का पालन नहीं किया है, इसलिए अगर ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी तरह का नियम तोड़े, तो केंद्र सरकार कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है।

यानी सरकार चाहे तो आसानी से ट्विटर को कानूनी पचड़े में फंसा सकती हैष दूसरी तरफ सूचना प्रसारण मंत्री का पद संभालते ही अश्निनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने Twitter के साथ चल रहे सरकार के विवाद पर अपना सख्त रुख दिखाया है।

वैष्णव ने गुरुवार को पदभार संभालने के साथ ही ट्विटर को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि देश का कानून सबसे ऊपर है। ट्विटर द्वारा नए IT कानून का पालन नहीं करने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सभी को नए दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

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ओडिशा से सांसद वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। उन्हें सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ साथ रेलवे का भी प्रभार दिया गया है। बता दें कि अश्विनी वैष्णव ने रविशंकर प्रसाद की जगह ली है। वह पिछले कुछ समय से ट्विटर के साथ अपनी नोंक-झोंक लेकर काफी चर्चा में रहे थे। माना जा रहा है कि ट्विटर विवाद को ढंग से हैंडल नहीं करने की वजह से ही रविशंंकर प्रसाद को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। ऐसे में नये मंत्री अगर जल्द ही कोई सख्त कदम उठायें, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।

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उधर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि अगर ट्विटर की ओर से भारत के नए आईटी नियमों को लागू नहीं किया जाता है तो फिर उसे किसी भी तरह का कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। वैसे ट्विटर ने जरूर जोर देकर कहा कि उनकी तरफ से अंतरिम अधिकारी(RGO) की नियुक्ति कर दी है, पर स्थाई के लिए कुछ समय चाहिए। कोर्ट ने ट्विटर की ओर से नियुक्त किए गए सभी अंतरिम अधिकारियों से एफिडेविट मांगा है कि वे खुद को सौंपे गए टास्क की जिम्मेदारी लेते हैं। इससे पहले केस की सुनवाई के दौरान ट्विटर ने कहा कि उसे भारत में शिकायत अधिकारी नियुक्त करने के लिए 8 सप्ताह का वक्त चाहिए।

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