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चूहे की मौत का दुख:12 साल की मासूम ने लगाई फांसी

भोपाल। 12 साल की मासूम देवांशी ने शुक्रवार को अपने मकान में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वह अपने सबसे प्यारे सफेद चूहे की मौत से दुखी थी। वह शुक्रवार सुबह से ही फूट-फूटकर रो रही थी। चूहे की मौत के बाद मां वसुंधरा ने उसके शव को फिकवाने को कहा तो उसने इनकार कर दिया। उसने अपने पालतू चूहे का घर के सामने पार्क में दफनाने का फैसला लिया। देवांशी ने सुबह रोते हुए दुखी मन से चूहे को पार्क में दफनाया।

उसकी कब्र पर फूल रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दोपहर में अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। जब थोड़ी देर बाद मां ने दरवाजा खटखटाया तो कमरा अंदर से बंद था। मां और पिता ने दरवाजा तोड़ा तो वह फंदे पर लटकी हुई थी। परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

अयोध्या नगर प्रभारी एसआई बलजीत सिंह के अनुसार सुरभि परिसर अयोध्या नगर मेंं रहने वाली 12 वर्षीय देवांशी राठौर आनंद नगर स्थित एक निजी स्कूल में 7वीं क्लास में पढ़ती थी। वह पढ़ने में काफी मेधावी थी। उसके पिता महेंद्र खेती-किसानी करते हैं। देवांशी उनकी बड़ी बेटी थी। उसके लिए पिता ने कुछ दिन पहले एक प्यारा सा पपी लाकर दिया था। जिसके साथ वह खेलती रहती थी। अपने हाथ से ही उसे खाना खिलाती थी। वह पपी को बहुत प्यार करती थी। कुछ दिन पहले उसकी मौत हो गई थी।

इस कारण वह उदास रहने लगी थी। उसने स्कूल जाना भी छोड़ दिया था। इसके बाद उसके पिता ने दो दिन पहले ही एक सुंदर सफेद चूहा लाकर दिया था। चूहे के साथ वह खेलने लगी थी। वह थोड़ी खुश भी दिखने लगी थी। लेकिन शुक्रवार सुबह सफेद चूहे की भी मौत हो गई।

पपी और चूहे की मौत के बाद डिप्रेशन चली गई देवांशी

एसआई सिंह का कहना है कि पहले पपी फिर सफेद चूहे की मौत के बाद देवांशी काफी डिप्रेशन में चली थी। उसने सुबह से कुछ भी नहीं खाया था। वह लगातार रो रही थी। उसके परिजनों का कहना है कि डिप्रेशन में होने के कारण देवांशी ने अपने आप को कमरे में बंद कर लिया और फांसी लगा ली। दरवाजा तोड़कर परिजन उसे अस्पताल लेकर दौड़े लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। दो बहनें और एक भाई में देवांशी सबसे बड़ी थी। उसके छोटी बहन नौ साल की प्रियदर्शिनी और फिर सात साल का भाई शौर्यदर्शन है। देवांशी अपने भाई व चूहे के साथ दिनभर खेलती थी।

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