3 दिन और 2 मुलाकात…तब जाकर राजी हुए तीरथ सिंह रावत, जानें उत्तराखंड में कैसे चढ़ा सियासी पारा

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उत्तराखंड में चार महीने के अंदर ही सरकार को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है।भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के बाद सीएम तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार देर रात राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा सौंप दिया।

इससे पहले दिल्ली में तीरथ ने सांविधानिक संकट का हवाला देते हुए खुद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में पद छोड़ने की इच्छा जताई थी।

उपचुनाव के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह चुनाव आयोग को तय करना है कि कब चुनाव कराना है।

वह शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर काम करेंगे। शुक्रवार को नड्डा के आवास पर मुख्यमंत्री की लगभग आधे घंटे की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब रावत के भविष्य को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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इसके पहले रावत ने बुधवार को देर रात भाजपा अध्यक्ष नड्डा व गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।

वह गुरुवार को वापस जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी। इसके बाद वह शुक्रवार को एक बार फिर भाजपा अध्यक्ष से मिले।

पौड़ी से लोकसभा सांसद रावत ने इस साल 10 मार्च को मुख्यमंत्री का पद संभाला था। अपने पद पर बने रहने के लिए 10 सितम्बर तक उनका विधानसभा सदस्य निर्वाचित होना संवैधानिक बाध्यता है।

प्रदेश में फिलहाल विधानसभा की दो सीटें गंगोत्री और हल्द्वानी रिक्त हैं जहां उपचुनाव कराया जाना है।

कोरोना काल में चुनाव आयोग ने सभी तरह के चुनाव रोक रखे हैं। ऐसे में उपचुनाव कराए जाने का फैसला निर्वाचन आयोग पर निर्भर करता है।

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