बुजुर्ग पिटाई केस:​​​​​​​ ट्विटर ने झाड़ा पल्ला- घटना से हमारा लेना-देना नहीं, हम ऐसे टॉपिक को डील नहीं करते

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट और अभद्रता के मामले में ट्विटर ने पुलिस की नोटिस का जवाब दिया है। इसमें ट्विटर इंडिया के MD मनीष माहेश्वरी ने कहा कि विवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हम ऐसे टॉपिक को डील नहीं करते।

7 दिन के अंदर लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन आकर बयान दर्ज कराने की बात पर MD ने कहा कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में जुड़ सकते हैं। हालांकि पुलिस इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में वह ट्विटर को दोबारा नोटिस भेज सकती है।

17 जून को भेजा था नोटिस
इससे पहले गाजियाबाद पुलिस ने 17 जून को ट्विटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष माहेश्वरी को लीगल नोटिस भेजा था। पुलिस ने उन्हें 7 दिन के अंदर लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन आकर बयान दर्ज कराने को कहा था।

नोटिस में पुलिस ने क्या कहा था?
नोटिस में कहा गया था कि ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया और ट्विटर INC के जरिए कुछ लोगों ने अपने ट्विटर हैंडल का उपयोग करते हुए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की। इन कोशिशों को रोकने के लिए कंपनी की तरफ से कोई नोटिस नहीं लिया गया और ऐसे समाज विरोधी संदेश को लगातार वायरल होने दिया गया। पुलिस ने स्पष्टीकरण देने के लिए ट्विटर को एक हफ्ते की मोहलत दी थी।

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इससे पहले भेजे 26 मेल का जवाब नहीं दिया

इससे पहले गाजियाबाद पुलिस ने रविवार को दावा किया था कि उसकी ओर से ट्विटर को पिछले एक साल में करीब 26 मेल किए गए, इनमें से एक का भी जवाब नहीं दिया गया है। ये सभी मेल 15 जून 2020 से 15 जून 2021 के बीच भेजे गए थे।
पुलिस के डेटा के मुताबिक, इस दौरान फेसबुक को 255 मेल किए गए। इनमें से सिर्फ 177 का जवाब आया। इसी तरह इंस्टाग्राम को भेजे गए 62 में से 41 और वॉट्सऐप को भेजे गए 58 मेल में से सिर्फ 28 का जवाब आया।
जवाब में लेटलतीफी भी बड़ा मुद्दा
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स से मांगी गई जानकारियों का जवाब काफी देर में दिया जा है। यह भी एक अहम मुद्दा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जवाब देने में 40 से 60 दिन लगाते हैं। वहीं, वॉट्सऐप से हमे रिप्लाई मिलने में 90 दिन तक लग जाते हैं।

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3 पॉइंट में समझें- गाजियाबाद में क्या हुआ था?

उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस ने लोनी इलाके में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद ट्विटर समेत 9 पर FIR दर्ज की थी। इन सभी पर घटना को गलत तरीके से सांप्रदायिक रंग देने की वजह से यह एक्शन लिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा गया और उसकी दाढ़ी काट दी गई।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की सच्चाई कुछ और ही है। पीड़ित बुजुर्ग ने आरोपी को कुछ ताबीज दिए थे, जिनके परिणाम न मिलने पर नाराज आरोपी ने इस घटना को अंजाम दिया, लेकिन ट्विटर ने इस वीडियो को मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़ित ने अपनी FIR में जय श्री राम के नारे लगवाने और दाढ़ी काटने की बात दर्ज नहीं कराई है।
जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें अय्यूब और नकवी पत्रकार हैं, जबकि जुबैर फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज का लेखक है। डॉ. शमा मोहम्मद और निजामी कांग्रेस नेता हैं। वहीं, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष उस्मानी को कांग्रेस ने पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतारा था।
ट्विटर कठघरे में क्यों?
FIR में लिखा गया कि गाजियाबाद पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण जारी करने के बावजूद आरोपियों ने अपने ट्वीट्स डिलीट नहीं किए, जिसके कारण धार्मिक तनाव बढ़ा। इसके अलावा ट्विटर इंडिया और ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से भी उन ट्वीट को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। इनके खिलाफ IPC की धारा 153, 153-A, 295-A, 505, 120-B, और 34 के तहत FIR दर्ज की गई है।

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