Astrological News: गंगा दशहरा पर गुरु ग्रह हो रहे वक्री, साइंस, टैक्नोलॉजी में होगी प्रगति

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रायपुर। Astrological News: ज्योतिष की मान्यता है कि जिसकी कुंडली में गुरु यानी बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है, वह जातक तेजी से प्रगति की ओर अग्रसर होता है। सभी ग्रह की अपेक्षा गुरु अधिक शुभ फल प्रदान करता है।

दो दिन बाद गंगा दशहरा वाले दिन 20 जून को बृहस्पति ग्रह कुंभ राशि में वक्री होगा, यानी उल्टी चाल से चलना प्रारंभ करेगा। बृहस्पति के प्रभाव से साइंस, टैक्नोलॉजी क्षेत्र में व्यापक प्रभाव होगा।

अंतरिक्ष विज्ञान यानी उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में प्रगति होगी। सैन्य क्षमता में सुधार होगा। कृषि क्षेत्र में समस्याएं आएंगी। किसानों में आक्रोश पनपेगा। राजनीतिक गतिविधियां बढ़ेगी।

ज्योतिषाचार्य विनीत शर्मा के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति 20 जून को गंगा दशहरा पर स्वाति नक्षत्र और तुला राशि के चंद्रमा में कुंभ राशि में वक्री हो रहे हैं। धीरे-धीरे यह कुंभ से मकर राशि की ओर बढ़ेगा।
वक्री का अर्थ है कि वृहस्पति, सूर्य से नवम-पंचम का संबंध बना रहा है। लगभग चार माह तक वक्री स्थिति में रहेगा। यह 15 सितंबर को मकर राशि में फिर से मार्गी होगा।

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इसके बाद 21 नवंबर को बृहस्पति फिर से कुंभ राशि में आ जाएगा। शनि की राशि में होने से यह कार्यों को शनै-शनै कर देता है। कुंभ राशि में गुरु रहेंगे और मकर राशि में शनि रहेंगे। दोनों मंदचारी ग्रह हैं, यह अस्थिरता को प्रदर्शित करता है। बृहस्पति के वक्री गति अर्थात उल्टी चाल से अच्छी बारिश की संभावना है। बाढ़ के हालात बन सकते हैं। व्यापार क्षेत्र में लोहे का बाजार संतुलित रहेगा।

आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश

22 जून को सूर्य, आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। आर्द्रा नक्षत्र को मानसून का कारक नक्षत्र माना जाता है। इस दिन से देशभर में मानसून अपनी गति पकड़ लेगा। साथ ही इसी दिन शुक्र ग्रह, मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस संयोग से व्यापार और कृषि के क्षेत्र में उन्नति होगी।

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गुरु ग्रह का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति ग्रह को 12 राशियों के चक्र को पूरा करने 12 साल लगते हैं, अर्थात बृहस्पति एक साल में अपनी राशि बदलता है। शनि के बाद गुरु ग्रह ही ऐसा ग्रह है, जो एक राशि में एक साल तक रहता है। गुरु ग्रह जब वक्री अवस्था में होते हैं, तो शुभ फल प्रदान करते हैं। कर्क राशि में गुरु उच्च का होता है।

मकर राशि में यह नीच का होता है। इसे धनु और मीन राशि का स्वामी माना जाता है। सूर्य, चंद्रमा, मंगल के साथ इसका संबंध मित्रवत है, दूसरी ओर शुक्र, बुध के साथ शत्रुता होती है। राहु, केतु, शनि के साथ संबंध स्थिर होता है।

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इन राशियों पर प्रभाव

मेष, वृषभ, सिंह, कुंभ और धनु राशि के जातकों को धन लाभ, नौकरी में प्रगति और कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के वैवाहिक जीवन में अवरोध, स्वास्थ्य हानि की संभावना तथा मिथुन, तुला और मकर राशि के लिए साधारण परिणाम देने वाला रहेगा।

जून में ग्रह बदलाव

दो जून को मंगल ग्रह ने मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश किया था। तीन जून को बुध, वृषभ राशि में वक्री हुआ। 15 जून को सूर्य ग्रह ने वृषभ से मिथुन राशि में गोचर किया। गुरु 20 जून को कुंभ राशि में वक्री होंगे और 22 जून को शुक्र ग्रह, मिथुन राशि से निकलकर कर्क में गोचर करेंगे।

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