शुगर कंट्रोल करने के लिए डाइट में जरूर शामिल करें बीटा-कैरोटीन रिच फूड्स

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नई दिल्ली। रक्त में शर्करा स्तर बढ़ने से मधुमेह की समस्या होती है। इस बीमारी में अग्नाशय से इंसुलिन हार्मोन निकलना कम या बंद हो जाता है। इसके लिए मधुमेह के मरीजों को मीठा खाने की मनाही होती है। विशेषज्ञों की मानें तो मधुमेह एक लाइलाज बीमारी है, जो एक बार लग जाने के बाद ज़िंदगीभर साथ रहती है। अतः मधुमेह के मरीजों को अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। मधुमेह कई प्रकार के हैं। इनमें टाइप 2 मधुमेह अधिक खतरनाक है। टाइप 2 मधुमेह में अग्नाशय से इंसुलिन हार्मोन निकलना पूरी तरह से बंद हो जाता है। अगर आप भी मधुमेह के मरीज हैं और शुगर कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में बीटा कैरोटीन युक्त चीजों को जरूर शामिल करें। कई शोधों में खुलासा हो चुका है कि बीटा कैरोटीन शुगर कंट्रोल करने में सक्षम है। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

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बीटा कैरोटीन क्या है

जानकारों की मानें तो बीटा कैरोटीन कार्बनिक यौगिक का रूप है। आसान शब्दों में कहें तो बीटा कैरोटीन के चलते फलों और सब्जियों का रंग पीला होता है। सेहतमंद रहने के लिए डाइट में आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्कता पड़ती है। इनमें एक पोषक तत्व बीटा कैरोटीन है। बीटा कैरोटीन सेहतमंद रहने में अहम भूमिका निभाता है। इससे युक्त फलों और सब्जियों को खाने से विटामिन-ए प्राप्त होता है, जिससे कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। खासकर मधुमेह, कैंसर, ह्रदय आदि बीमारियों के लिए यह फायदेमंद साबित होता है।

क्या कहती है शोध

रिसर्चगेट पर छपी एक लेख में बीटा कैरोटीन के फायदे पर गहन शोध किया गया है। इस शोध से खुलासा हुआ है कि बीटा कैरोटीन मोटापा और शुगर कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसमें एंटी डायबिटिक के गुण पाए जाते हैं, जो शुगर कंट्रोल करने में सहायक होते हैं। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण भी पाया जाता है, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के चलते भी मधुमेह और मोटापा की समस्या होती है। इसके लिए मधुमेह के मरीजों को शुगर कंट्रोल करने के लिए बीटा कैरोटीन युक्त चीजें जैसे साबुत अनाज, गोभी, कद्दू, ब्रोकली, सलाद समेत पीली सब्जियों का सेवन रोजाना करना चाहिए। शोध की मानें तो रोजाना 5 ग्राम से अधिक बीटा कैरोटीन का सेवन नहीं करना चाहिए।

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डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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