संसद का मानसून सत्र जुलाई में, पेश हो सकते हैं कई अहम विधेयक

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केंद्र सरकार जुलाई के मध्य में संसद के मानसून सत्र का आयोजन करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, संसद का मानसून सत्र जुलाई में शुरू होगा। वहीं संसदीय समितियों का कामकाज 16 जून से शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।

गौरतलब है कि संसद में 40 से अधिक विधेयकों और पांच अध्यादेशों के लंबित होने के साथ, नरेंद्र मोदी सरकार का विधायी एजेंडा मानसून सत्र के लिए व्यस्त होना तय है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने जानकारी दी। इनमें- प्रमुख हवाई अड्डों को नामित करने के लिए एक विधेयक, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रस्तावित कानून, बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करना, और एक अंतरराज्यीय नदी जल विवाद निवारण समिति की स्थापना शामिल हैं।

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सरकार कोरोना की दूसरी लहर के धीमे होने के साथ ही सामान्य कार्यक्रम के तहत जुलाई में संसद का मानसून सत्र शुरू करने पर विचार कर रही है।

संसद के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम कोविड -19 मामलों में दोबारा उछाल की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मानसून सत्र के लिए एक सही स्लॉट तय करना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले तीन संसद सत्रों को कोरोना के ही चलते छोटा करना पड़ा था। वहीं दोनों सदनों में शीतकालीन सत्र को पूरी तरह से छोड़ दिया गया था। मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई में आयोजित किया जाता है।

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कोविड -19 की दूसरी लहर के कारण बजट सत्र को समय से पहले खत्म करने के बाद केंद्र सरकार ने पांच अध्यादेश जारी किए। होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अध्यादेश, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) अध्यादेश और न्यायाधिकरण सुधार (तर्कसंगतीकरण और सेवा की शर्तें) अध्यादेश वर्तमान में लागू है। इन अध्यादेशों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा क्योंकि संविधान इसके लिए संसद सत्र की शुरुआत से केवल छह सप्ताह का समय देता है।

संसद में लंबित बिल

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) विधेयक: अधिनियम के तहत, रखरखाव न्यायाधिकरण बच्चों को उनके माता-पिता के लिए प्रति माह ₹ 10,000 तक का भुगतान करने का निर्देश दे सकता है।

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किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक: विधेयक बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों की मांग करता है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक: इसके तहत प्रत्येक सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी क्लिनिक और बैंक को भारत के बैंकों और क्लीनिकों की राष्ट्रीय रजिस्ट्री के तहत पंजीकृत होना चाहिए।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च बिल: ये बिल अहमदाबाद, हाजीपुर, हैदराबाद, कोलकाता, गुवाहाटी और रायबरेली में स्थित छह निकायों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करने के लिए है।

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