Solar Eclipse, Surya Grahan 2021: सूर्य ग्रहण से जुड़ी वो रोमांचक बातें जो शायद ही कोई जानता हो?

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Solar Eclipse, Surya Grahan 2021: 10 जून यानी कल साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, आमतौर पर सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों को कुछ खास पता नहीं होता है या तो वह ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इसके बारे में जानते हैं कि क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए? या फिर विज्ञान से जुड़ी कुछ बातें ही पता होती हैं। अगर आप भी 10 जून 2021 लगने वाले सूर्य ग्रहण पर कुछ रोमांचक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप बिलकुल सही जगह पर आए हैं। इस बारे में विस्तार से जानने से पहले आप यह जान लें कि हर साल सूर्य ग्रहण कम से कम 2 बार या फिर अधिकतम 5 बार ही लगता है। बहुत ही कम मामले में ऐसा होता है कि सूर्य ग्रहण की स्थिति अलग हो वरना आमतौर पर हर सूर्य ग्रहण में एक जैसी ही स्थितियां पैदा होती हैं। चलिए अब इन्ही स्थितियों के बारे में जानते हैं जिसे आमतौर पर लोग नहीं जानते..

चमकती हुई चूड़ी या अगूंठी की तरह दिखाई देगा

10 जून को सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी ये तीनो ही एक सीध में आ जाते हैं। आप यह तो जानते ही हैं कि सूर्य चंद्रमा से काफी बड़ा होता है, और जब सूर्य और चंद्रमा एक ही सीध में आ जाते हैं तो चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह से कवर नहीं कर पाता सूर्य का मध्य भाग तो कवर हो जाता है लेकिन बाहरी भाग का कुछ अंश कवर नहीं हो पाता। तो ऐसी स्थिति में सूर्य से जो प्रकाश उत्सर्जित होता है और उसके सामने जब चंद्रमा आता है उस समय जो दृश्य बनता है वह एक चमकती हुई अंगूठी या फिर चमकती हुई चूड़ी के समान दिखाई देता है, जो बहुत ही अद्भुत और अकल्पनिय है। यह तो हो गई मुख्य बातें लेकिन अब हम सूर्य ग्रहण के समय किस तरह की स्थितियाँ पैदा होती हैं उस विषय के बारे में जानते हैं

सूर्य ग्रहण को लेकर सबसे पहले आपको बतादें कि सूर्य ग्रहण जहां भी लगता है या फिर जिस भी स्थान पर इसे देखा जाता है, वहां का तापमान लगभग 20 डिग्री सेंटीगेड तक नीचे गिर जाता है।
उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से सिर्फ आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिख सकता है, पूर्ण सूर्य ग्रहण यहां से कभी नहीं दिख सकता।
सूर्य ग्रहण के समय पृथ्वी पर पड़ने वाली परछाईं की अधिकतम चौड़ाई 167 मील हो सकती है, लेकिन इससे अधिक कभी नहीं हो सकती।

जब-जब सूर्य ग्रहण जैसी स्थिति बनती है तब-तब पृथ्वी की घुर्णन गति में 0.001 सेकेंड प्रति दशक की कमी आती है।
सूर्य ग्रहण के समय पृथ्वी पर चंद्रमा की परछाई 1100 मील प्रति घंटा की रफ्तार से इक्वेटर पर चलती है।
सूर्य ग्रहण के समय पृथ्वी के ध्रुवों पर चंद्रमा की परछाई 5000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है।

सूर्य ग्रहण के समय पशु-पक्षी कन्फ्यूज हो जाते हैं और सोने की तैयारी करने लगते हैं।

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