Katni Corona Update: कैमोर में भी बढ़ता जा रहा कोरोना का कहर, एक दिन में 15 लोग संक्रमित

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कटनी/कैमोर। उद्योग नगरी कैमोर में कोरोना का खतरा दिनोदिन बढ़ता जा रहा। पिछले एक सप्ताह में यहां कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा आधा सैकड़ा के पार जा चुका है।

कल 15 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज जबलपुर से आई रिपोर्ट में यहां एक साथ 15 लोग संक्रमित मिले हैं, जिनमें एसीसी हॉस्पिटल की प्रमुख महिला चिकित्सक सहित कई अधिकारी, ठेकेदार एवं अन्य लोग भी शामिल हैं।

कोरोना के बढ़ते संकट से लोग दहशत में है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां लॉकडॉउन का सख्ती से पालन कराने के तो सारे इंतजाम है। चलित जेल वाहन तक है, पर कोरोना संक्रमितों के इलाज की कोई सुविधा नहीं है।

कोविड वार्ड तक नहीं बनाया गया है। कोरोना जांच का सेम्पल देने भी लोगों को 10 किलोमीटर दूर विजयराघवगढ़ स्थित सामुदायिक केंद जाना पड़ता है।

कोरोना के पिछले दौर में कांग्रेस नेता गुड्डू दीक्षित एवं श्रमिक नेता लड्डू पांडेय सहित आधा दर्जन से अधिक लोग असमय इस संसार से विदा हो गए। वे लोग भी जिनके पास अच्छे से अच्छा इलाज कराने की साम्यर्थ थी। कोरोना की मार से अपने आप को नहीं बचा सके।

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कुछ खुशकिस्मत भी रहे, जिन्होंने कोरोना के साथ हिम्मत और साहस के साथ जंग लड़ी और कोरोना को मात देकर आज पूर्णत: स्वस्थ हैं।

कोरोना ने हमसे न केवल हमारे कई करीबियों को छीन लिया, बल्कि मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को आर्थिक संकट में लाकर खड़ा कर दिया। बड़े बड़े उद्योग बंद रहे। काम, धंधा, व्यापार और मजदूरों का रोजगार चौपट हो गया।

पिछले साल की इन दु:खद कड़वी यादों को लोग भुला भी नहीं पाए थे कि अब 2021 में भी एक बार फिर कोरोना अपनी रफ्तार पकड़ रहा। रोज सं्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही। कल 15 अप्रैल को जिले में आधा सैकड़ा संक्रमित मिले हैं, जिनमें 15 कैमोर के हैं। एसीसी की प्रमुख चिकित्सक डॉ उज्जवला पाटिल भी संक्रमित हो गई हैं।

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कुछ अधिकारी भी पाजेटिव मिले हैं। कुछ युवा उद्यमी जबलपुर के हॉस्पिटल में कोरोना के उपचार के लिए भर्ती हैं।

न कोविड वार्ड है, न स्टाफ
कैमोर में कोरोना से निपटने कोई इंतजाम नहीं किये गए। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड वार्ड के लिए न तो जगह है न स्टाफ। एक महिला आयुष चिकित्सक के भरोसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा।

इन दिनों इसे केवल वैक्सीन सेंटर कहा जा सकता है, क्योंकि एकमात्र आयुष चिकित्सक के साथ पूरा स्टाफ केवल वैक्सीनेशन में ही व्यस्त रहता है। जिला प्रशासन अगर एसीसी या एवरेस्ट से स्थान लेकर अस्थायी कोविड वार्ड बना भी दे तो स्टाफ नहीं है। स्वास्थ्य विभाग एक साल से कोरोना की चुनौती के बाद भी कर्मचारियों की टेम्परेरी भर्ती भी नहीं कर पाया।

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टेस्टिंग की रिपोर्ट में देरी हो रही
कैमोर में में कोरोना की जांच के लिए सेम्पल लेने तक कि व्यवस्था नहीं है। जांच कराने 10 किलोमीटर दूर विजयराघवगढ़ जाना पड़ता है। वहां भी लंबी लाईन है। जांच के लिए सेम्पल जबलपुर भेजा जाता है, जहां से रिपोर्ट आने में चार पांच दिन तक लग जाते हैं। इस बीच कोरोना संक्रमित व्यक्ति औरों के सम्पर्क में आकर उन्हें भी संक्रमित कर देता है। खुद संक्रमित व्यक्ति में भी संक्रमण बढ़ जाता है, जिससे इलाज के दौरान रिकवरी में देर होती है। जांच रिपोर्ट जल्द मिलने की व्यवस्था जरूरी है।

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