शहर में आक्सीजन सिलेंडर की कमी, डीजल शेड में आक्सीजन सिलेंडर से काटे जा रहे कंडम इंजन

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  • शहर में आक्सीजन सिलेंडर की कमीडीजल शेड में आक्सीजन सिलेंडर से काटे जा रहे कंडम इंजन
  • कोरोना महामारी थमने तक रोक लगाने की जहमत भी नहीं उठा पा रहा जिला प्रशासन

कटनी। विवेक शुक्ला। जिले में कोरोना बीमारी के साथ-साथ ऑक्सीजन की कमी भी एक संकट बनता जा रहा है। जैसे-जैसे कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे शहर में ऑक्सीजन सप्लाई की कमी देखी जा रही है और ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। ऑक्सीजन की कमी होने की वजह से कई कोरोना पीडि़त दम भी तोड़ रहे हैं।

इस सबके बावजूद एनकेजे स्थिति डीजल लोको शेड में कंडम रेल इंजनों को काटने के लिए भरपूर मात्रा में आक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है। यहां आज भी आक्सीजन सिलेंडर से कंडम रेल इंजनों को काटने का काम कराया जा रहा है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी जिले के मुखिया कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को नहीं है। इसके बावजूद कोरोना बीमारी थमने तक इस कार्य में रोक नहीं लगाई जा रही है। रेलसूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पश्चिम मध्य रेलवे के ज्यादात्तर रेलखंड विद्युतीकृत हो चुके हैं।

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जिसके कारण भारी संख्या में डीजल इंजन बेकार हुए हैं। जिसमें से कई डीजल इंजन कंडम घोषित किए गए हैं। इन्हीं कंडम डीजल इंजनों का काटने का काम पिछले कुछ दिनों से एनकेजे स्थित डीजल लोको शेड में किया जा रहा है। बताया जाता है कि कंडम डीजल इंजनों को काटने के लिए जबलपुर के किसी निजी ठेकेदार द्धारा प्रतिदिन 20 से 25 आक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है।

नहीं उठा कलेक्टर का मोबाइल

जैसा की सर्वविदित है कि संकंट की इस घड़ी में भी कलेक्टर प्रियंक मिश्रा मोबाइल अटेंड नहीं करते वैसा ही इस मामले में भी देखने को मिला। डीजल लोको शेड में कंडम इंजन आक्सीजन सिलेंडर से काटे जाने के संबंध में प्रशासन का पक्ष जानने कलेक्टर श्रीमिश्रा को फोन लगाया गया लेकिन हमेशा की तरह उन्होने मोबाइल अटेंड नहीं किया।

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इसके लिए स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार-डीआरएम

इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक संजय विश्वास से बात की गई तो उनका कहना था कि कंडम इंजनों को काटने का काम रेलवे ने ठेके पर दिया है तथा ठेकेदार कहां से आक्सीजन सिलेंडर लाकर कंडम इंजन काट रहा है, इससे रेलवे को कोई लेना देना नहीं यदि शहर में आक्सीजन सिलेंडर की कमी है तो इसके लिए स्थानीय जिला प्रशासन जिम्मेदार है और वह चाहे तो कंडम इंजनों की कटिंग पर रोक लगा सकता है।

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