नीलिमा अजीम ने दो शादियों के टूटने का बताया दर्द, दोनों बेटों शाहिद कपूर और ईशान खट्टर का कैसा था रिएक्शन?

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शाहिद कपूर की मां और अभिनेत्री नीलिमा अजीम की निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। अब उन्होंने अपनी दोनों नाकाम शादियों पर बात की है।

एक इंटरव्यू में नीलिमा अजीम ने बताया कि शादी टूटने के बाद वह सदमे में थीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसे बचाया जा सकता था अगर इस पर और नियंत्रण होता।

नीलिमा ने पहली शादी अभिनेता पंकज कपूर से की जिनसे शाहिद कपूर हुए। वहीं उनकी दूसरी शादी राजेश खट्टर से हुई थी। दोनों का एक बेटा ईशान खट्टर हुआ।

राजेश खट्टर से शादी को बचाया जा सकता था’
राजेश खट्टर से शादी के सवाल पर नीलिमा कहती हैं कि ‘दूसरी शादी टिक सकती थी अगर कुछ चीजें नहीं होतीं। उन बातों को नजरअंदाज करना गलत होता और वो नामुकिन था। मुझे लगता है कि यह शादी बच सकती थी अगर इस पर और ज्यादा कंट्रोल, ज्यादा लॉजिक और सेंस होता लेकिन यह खत्म हो गया। यह सब बॉम्बे (मुंबई) में हुआ। सभी संघर्षों, दबावों के साथ।

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शाहिद कपूर और ईशान खट्टर ने दिया साथ
कभी-कभी लोग  आगे झुक जाते हैं। मेरे पास यह क्षमता थी कि फिर से शुरुआत की जाए। मेरी जिंदगी में मेरे दो प्यारे बेटे (शाहिद कपूर और ईशान खट्टर) हैं। वे मेरी प्रेरणा हैं। वे मेरी खुशी और प्रोत्साहन के स्रोत रहे हैं।

पंकज कपूर से शादी पर क्या बोलीं?
बॉलीवुड बबल को दिए इंटरव्यू में नीलिमा कहती हैं कि ‘मैंने अपने एक अच्छे दोस्त से शादी की थी। सब कुछ बहुत अच्छा था। मेरे माता-पिता अच्छे थे। मेरे आस-पास के लोग बहुत अच्छे थे।

तो मुझे ये पता ही नहीं था कि कुछ जिंदगी में ऐसा भी हो सकता है जिसमें पांव फिसल जाए और हम डप करके गिर जाएं क्योंकि सभी लोग मुझसे प्यार करते थे और मुझे फॉलो करते थे। यह कुछ इस तरह से है कि आप यंग हैं और पूरी तरह उत्साह से भरे होते हैं।

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अस्वीकृति, दर्द और अनजाने डर का अनुभव
‘यह पहली बार था जब मुझे वास्तव में दुख, पीड़ा, अस्वीकृति, चिंता, दर्द, एक अनजाना डर और बहुत सारी असुरक्षा का अनुभव हुआ। पहली बार था जब मैं फिसल गई थी और फेल हो गई लेकिन मैं इसे मेरी जिंदगी में हुई एक भयानक चीज के रूप में नहीं देखती।

मैं बस इतना सोचती हूं कि मुझे इस टक्कर की जरूरत थी। हम सभी को यह समझना चाहिए कि हम असाधारण नहीं हैं। हम बस इंसान हैं जिन्हें अस्वीकार किया जा सकता है। इन सबसे निकलने में मुझे एक-डेढ़ साल लग गए।‘

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