लगातार दूसरे साल चैत्र नवरात्रि पर कोरोना का साया

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कटनी। शहर ही नहीं सम्पूर्ण जिले में चैत्र नवरात्र गुड़ी पड़वा नव संवत्सर चेतीचांद के उत्साह में कोरोना बाधा बनेगा। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब चैत्र नवरात्र में कोरोना के साये के बीच माँ जगतजननी की आराधना घरों में ही होगी। मंदिरों में धार्मिक आयोजनों की अनुमति नहीं है। कटनी में 17 अप्रैल तक टोटल लॉक डाउन है केवल मंदिर के पुजारी को ही पूजा पाठ चंद लोगों के साथ करना होगी। इसी तरह हिन्दू नव वर्ष भी बधाई तक सीमित होगा। सिंधियों के विशेष पर्व चैत्रीचंद में भी कोरोना गाइड लाइन का पालन किया जाएगा। कटनी में हिन्दू नव वर्ष को काफी उत्साह से मनाया जाता है उम्मीद थी कि गत वर्ष लोग इन पर्वों को नहीं मना पाए थे जो इस वर्ष उत्साह से मनाने के लिए आतुर थे मगर महामारी ने इस पर पहरा लगा दिया।

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कटनी शहर के प्रमुख देवी मंदिर जालपा देवी में दूर से ही लोग दर्शन कर सकेंगे न तो पूजा की अनुमति होगी न ही जल चढ़ाने की। मंदिर समिति भी कोरोना की गाइड लाइन के अनुसार मंदिर में केवल दर्शन करने के प्रयासों में जुटी है। इसी प्रकार अन्य देवी मन्दिरों में भी कोविड गाइड लाइन का पालन किया जाएगा। माना जा रहा है कि 9 दिन की यह भक्ति का पर्व पूरा कोरोना के साये में गुजरेगा क्योंकि जैसे ही लॉक डाउन समाप्त होगा शनिवार रविवार का लॉक डाउन शुरू हो जाएगा। उम्मीद है कि रामनवमी को लोग मना सकेंगे लेकिन इस विषय पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता।

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चैत्र नव रात्रि घट स्थापना मूहर्त: चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल पक्ष मंगल वार को घट स्थापना का शुभ मूहर्त प्रात: 5.28 मिनिट से सुबह 10.56 तक रहेगा। घट स्थापना का शुभ मूहर्त है दिन में 10.56 से 12.56 तक लाभ, अमृत एवम अभिजीत मूहर्त रहेंगे। चैत्र नवरात्रि में रामनवमी तक रामरक्षास्त्रोत , रामचरित मानस, वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड, हवन आदि के अनुष्ठान की परंपरा रही है। सभी प्रकार की सिद्धियों के लिए माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। मान्यता अनुसार कि रामरक्षास्त्रोत के पाठ की शुरूआत नवरात्रि से ही की जानी चाहिए, स्वयं भगवान श्रीराम ने भी रावण से युद्ध के पूर्व मां दुर्गा को प्रसन्न कर उनसे शक्ति मांगी थी।

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