High Blood Pressure से न डरें, इन बातों का ध्‍यान रखकर रह सकते हैं सेहतमंद

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High Blood Pressure: ‘व‍िश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार दक्षिण एशियाई देशों में 40 से 55 वर्ष की उम्र में भारतीयों में अन्‍य 20 देशों की तुलना में उच्‍च रक्‍तचाप अधिक पाया जाता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार 30 वर्ष की उम्र के बाद पांच करोड़ लोगों को अनुमान से उच्‍च रक्‍तचाप है। प्रत्‍येक चार में एक व्‍यक्ति उच्‍च रक्‍तचाप से प्रभावित है, जबकि हर तीन में से एक व्‍यक्ति इसे महसूस नहीं कर पाता।’ यह कहना है इंदौर के हृदय, रक्‍तचाप और मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉक्‍टर अरविंद कुमार पंचोलिया का। उनके अनुसार उच्‍च रक्‍तचाप दुनियाभर में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है, वहीं भारत में भी इसका अनुपात 6-14 प्रतिशत है। विशेष बातचीत में डॉक्‍टर पंचोलिया ने उच्‍च रक्‍तचाप से जुडी महत्‍वपूर्ण जानकारियां दी हैं।

क्‍या रक्‍तचाप बुरा है और सदैव सामान्‍य रहना चाहिये

डॉक्‍टर पंचोलिया के अनुसार रक्‍त के दबाव में साधारण उतारचढ़ाव से सामान्‍यत: हमारे स्‍वास्‍थ्‍य को खतरा नहीं होता, परंतु निरंतर उच्‍च रक्‍तचाप के कारण गंभीर परिणाम हो सकते हैं। रक्‍तचाप व्‍यायाम, दबाव तथा क्रोध व भय से प्रभावित होता है। आमतौर पर 120/80 से अधिक को बढ़ा हुआ रक्‍तचाप माना जाता है। पर समय-समय पर इसके मानक बदलते रहते हैं।

किन्‍हें करवाना चाहिये रक्‍तचाप की जांच और क्‍या हैं इससे होने वाली परेशानियां

डॉक्‍टर पंचोलिया के मुताबिक 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को अपने रक्‍तचाप की जांच नियमित तौर पर करवानी चाहिये। वहीं मोटे अथवा सामान्‍य से अधिक वजन वालों के साथ ही धूम्रपान और मद्यपान करने वालों को भी इसकी जांच करवाते रहना चाहिये। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को उच्‍च रक्‍तचाप का जोखिम अधिक रहता है। साथ ही पारिवारिक-वंशानुगत,मोटापा, असंतुलित आहार, व्‍यायाम की कमी और तनाव लेने वालों को उच्‍च रक्‍तचाप का खतरा अधिक होता है।

उच्‍च रक्‍तचाप से संबंधित कुछ वास्‍तविकताएं

चिकित्‍सकों के अनुसार उच्‍च रक्‍तचाप का पूर्ण निवारण नहीं है। इसे केवल नियंत्रित किया जा सकता है। अपनी जीवन शैली में बदलाव कर इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है इसलिये इससे भयभीत होने की आवश्‍यकता नहीं है। डॉक्‍टर द्वारा बताई गई दवाइयों और नियमित व्‍यायाम ही इसका उपचार है। यह बात हमेशा ध्‍यान रखना चाहिये कि उच्‍च रक्‍तचाप की वजह से हृदय, मस्तिष्‍क और किडनी को तो नुकसान पहुंचता ही है। इसके साथ ही अंधत्‍व का खतरा भी रहता है।

दवाओं को लेकर यह ध्‍यान रखें

डॉक्‍टर पंचोलिया बताते हैं क‍ि रक्‍तचाप से संबंध‍ित दवाएं नियमित रुप से लेनी चाहिये। दवाएं अपने मन से न तो बंद करनी चाहिये और न ही बदलनी चाहिये। वहीं इसकी खुराक भी अपने हिसाब से नहीं बदलनी चाहिये।

इन बातों पर भी करें गौर

आक्‍सीकरण रोधी, प्रतिउपचायक आहार की मदद से रक्‍तचाप कम किया जा सकता है। नमक के सेवन पर नियंत्रण रखना पहली शर्त है। गेहूं, चावल, मक्‍का, अंकुरित दालों, हरी पत्‍तीदार सब्‍ज‍ियां,ताजे फल आदि का सेवन करना चाहिये। मिठाई, आइस्‍क्रीम, केक, अचार, पापड़, चटनियां, पनीर, मक्‍खन, घी, अधिक तला भोजन से परहेज करना चाहिये। वजन पर नियंत्रण आवश्‍यक है। बढ़े वजन से उच्‍च रक्‍तचाप का खतरा 2 से 6 गुना बढ़ जाता है जिससे हृदय रोग और आघात का जोखिम भी बढ़ता है। एक साथ अधिक खाने की बजाए अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा भोजन करें। किसी समय का भोजन न छोड़ें। तनाव मुक्‍त रहें इससे नकारात्‍मक विचार नहीं पनपेंगे।

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