वैक्सीन लगने के बाद क्यों हो रहे पॉजिटिव, जनिये कारण

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Corona कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद से पूरी दुनिया टीके का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। सभी यह मान रहे थे कि बीमारी को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है। लेकिन यह पूरी तरह सच होता नहीं दिख रहा है।

ऐसे कई मामले अब सामने आ रहे हैं जिनमें कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले लोग भी पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। अभिनेता परेश रावल से लेकर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला इसके बड़े उदाहरण हैं, जो टीके की पहली खुराक लेने के बाद भी पॉजिटिव पाए गए हैं। आइए हम समझते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है।

टीका लगने के बाद भी कोरोना की चपेट में आने के कारण

– ऐसे लोग एहतियाती उपायों का पालन नहीं कर रहे हैं जैसे कि सार्वजनिक रूप से मास्क पहनना, हाथों को साफ करना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह के अनुसार अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करना।

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डॉक्टरों द्वारा बताए गए टीकाकरण के नियमों का पालन नहीं करना

– दूसरी खुराक समय पर न मिलना या दूसरी खुराक न मिलना

– इम्यूनिटी मजबूत नहीं होना

विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण का मतलब वायरस का अंत नहीं है। टीकाकरण वायरस के खतरनाक प्रभावों के खिलाफ पूरी तरह से आपके शरीर की रक्षा करता है। संक्रमण किसी भी समय हो सकता है, टीकाकरण सिर्फ उन गंभीर मुद्दों को दूर करने में मदद करता है जो इसे बढ़ा सकते हैं।

जिन लोगों को टीका लगाया गया है, उन्हें वायरस को रोकने के लिए सभी सुरक्षा उपायों का पालन करने की आवश्यकता है। ये लोग वायरस को दूसरों तक भी पहुंचा सकते हैं।

क्या यह रि-इन्फेक्शन है ?
कुछ लोग मान रहे हैं कि टीकाकरण के बाद संक्रमित होने की प्रक्रिया पुन: संक्रमण का मामला हो सकता है, लेकिन यह सच नहीं है। टीकाकरण का पूरा उद्देश्य इसे गंभीर संक्रमण से हल्के संक्रमण में बदलना है। टीकाकरण दूसरों को सुरक्षित रखने के लिए संचरण की संभावना को भी कम करता है।

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अभी तक कोई टीका नहीं है जो वायरस के खिलाफ 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी देता है। अगर आपको टीका लगाया जाता है, तो भी आपको सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। संचरण दर को कम करने के लिए टीकाकरण आवश्यक है और इस प्रकार सभी को इसे प्राप्त करना चाहिए।

कोविड-19 जांच शुल्क आधा किया
महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के लिये आरटी – पीसीआर जांच की कीमत बुधवार को 1000 रुपये से घटा कर 500 रुपये कर दिया है। एंटीजन जांच के शुल्क में भी कमी की गयी है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इसकी घोषणा की।

महामारी की शुरूआत में आरटी-पीसीआर जांच की कीमत 4500 रुपये थी और राज्य सरकार ने समय समय पर इसे कम किया। लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रदीप व्यास ने बताया कि जांच के लिये नयी दरें 500 रुपये, 600 रुपये एवं 800 रुपये निर्धारित की गयी हैं।

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फाइजर ने अपने कोविड-19 रोधी टीके को बच्चों के लिये सुरक्षित बताया
दवा निर्माता कंपनी फाइजर ने बुधवार को कहा कि उसका कोविड-19 टीका 12 साल तक के बच्चों के लिये भी सुरक्षित है। कंपनी की इस घोषणा को इस आयु वर्ग के बच्चों के स्कूल जाने से पहले उनके टीकाकरण की संभावना के तौर पर देखा जा रहा है। कई देशों में ऐसे व्यस्कों को कोविड-19 टीकों की खुराकें दी जा रही है, जो कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में अति संवेदनशील हैं। फाइजर का टीका 16 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को लगाने की अनुमति है।

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