म्यांमार शरणार्थियों को न दें खाना और शरण, इस राज्य सरकार ने जिला प्रशासन और नागरिकों को दिया आदेश

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म्यामांर में एक बार फिर से सेना और विद्रोहियों के बीच छिड़ी जंग के बीच मणिपुर सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन को आदेश दिया है कि वे शरणार्थियों को भोजन और शरण मुहैया न कराए।

राज्य में शरणार्थियों की बाढ़ को रोकने के लिए यह आदेश जारी किया गया है। सरकार की ओर से चंदेल, तेंगनोपाल, कामजोंग, उखरुल, चूराचंदपुर जिलों के प्रशासन को आदेश दिया जारी किया गया है।

इसमें कहा गया है, ‘म्यांमार में पैदाा हुए हालातों के चलते ऐसे मामले देखे गए हैं, जब बड़ी संख्या में पड़ोसी देश के नागरिकों ने भारत में एंट्री का प्रयास किया है।’ ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन को यह ध्यान रखना है कि वे भारत में आने वाले लोगों के लिए फूड और शेल्टर की व्यवस्था न करें।

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राज्य सरकार ने आदेश दिया है कि ऐसे लोगों को सिर्फ मेडिकल सुविधा ही दी जाए। सरकार ने कहा कि किसी चोट या अन्य बीमारी की स्थिति में मेडिकल अटेंशन दिया जाए। मानवाधिकार के आधार पर ऐसा करना होगा। इसके अलावा सरकार ने स्थानीय नागरिकों से भी अपील है कि वे पड़ोसी देश से आने वाले लोगों को शरण न दें। इसके अलावा सरकार ने आधार पंजीकरण को फिलहाल स्थगित करने का आदेश दिया है और कहा है कि आधार एनरोलमेंट किट्स को सुरक्षित रखने की जरूरत है। राज्य सरकार का यह आदेश संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के राजदूत की ओर से यह अपील किए जाने के बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों से अपील की है कि वे देश में मौजूदा संकट को देखते हुए शरणार्थियों को पनाह दें।

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मिजोरम में भी शरणार्थियों का बढ़ रहा तेजी से आंकड़ा
मणिपुर सरकार ने भले ही शरणार्थियों को फूड और शेल्टर न देने का आदेश जारी किया है, लेकिन मिजोरम में भी संख्या बढ़ रही है। बीते महीने म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से राज्य में 1,000 से ज्यादा लोगों ने भारत में शरण ली है। इनमें से करीब 100 लोगों को सरकार की ओर से वापस उनके देश भेजा गया था, लेकिन वे फिर से मिजोरम में एंट्री कर गए हैं।

रिश्तेदारों के साथ भी रहने लगे हैं कुछ लोग
मिजोरम के गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि 10 मार्च को अवैध एंट्री के खिलाफ जारी आदेश के बाद अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई नया निर्देश नहीं मिला है। अधिकारी ने कहा कि सोमवार तक 1,042 म्यांमार नागरिकों की एंट्री मिजोरम में दर्ज की गई है। इनमें से ज्यादातर लोग सीमा पर ही रह रहे हैं। उन्हें स्थानीय एनजीओ की ओर से राहत और शरण दी जा रही है। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अपने रिश्तेदारों के संग रहे हैं।

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