OMG: पांच हजार के कर्ज में गवां दी मेडिकल की सरकारी नौकरी,फिर भी कर्ज से पीछा नहीं छूटा

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जबलपुर । 5 हजार कर्ज के पीछे मेडिकल के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को समय पहले से रिटायरमेंट लेना पड़ा, ब्याज के लाखों रूपए अदा करने के बाद भी वह कर्जदार बना हुआ है।

हद तो उस वक्त हुई जब सूदखोरों ने पीड़ित के पुराने चैकों के माध्यम से उसके खाते में जमा 1 लाख 55 हजार रूपए निकाल लिए। जब मामला गढ़ा थाना पहुंचा तो पुलिसकर्मी भी हैरान हो गए। मोक्ष संस्था के आशीष ठाकुर के साथ थाने पहुंचे मेडिकल कर्मी की पुलिस ने शिकायत दर्ज की और मामले की जांच शुरू की।

3 साल पहले नौकरी छोड़ दी थी
गढ़ा निवासी छोटे लाल डुमार मेडिकल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत था। सालों पहले तक छोटेलाल की जिंदगी में सबकुछ ठीक था परंतु एक सूदखोर से 5 हजार रूपए ब्याज में लेना उसे वक्त मंहगा पड़ गया जब वह इस कर्ज को चुकाने के लिए बहुत से सूदखोरों के गिरफ्त में आ गया। यहां तक कि इस कर्ज को उतारने उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। तीन साल पहले उसने अनिवार्य सेवानिवृत्ति ले ली और जिन-जिन लोगों से कर्ज लिया था उसे अपने फंड से मिली राशि से चुका दिया।

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अधिवक्ता निकले सूदखोर, पुलिस जांच में खुलासा
सूत्रों का कहना है कि पीड़ित मेडिकल कर्मचारी को ब्याज में पैसा देने वाले अधिवक्ता निकलें और पुलिस जांच में सामने आया है कि अधिवक्ताओं के द्वारा ही पुराने चैक से 1 लाख 55 हजार रूपए वृद्ध के खाते से निकाले थे। हालांकि मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद सूदखोरों ने वृद्ध की राशि लौटाने की बात कही है।

अपनो छोड़ा, गैरों ने दिया साथ
नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज में जब तक नौकरी की उस वक्त वृद्ध परिवार का हिस्सा था लेकिन नौकरी जाते ही वह गैर हो गया। उसका साथ अपने खून ही ने छोड़ दिया और उसे घर से बाहर कर दिया। वृद्ध किराये के मकान में रहकर गैरो के भरोसे जीवन जी जा रहा है।

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एटीएम-पासबुक जप्त कर ली थी
मोक्ष संस्था के प्रमुख आशीष ठाकुर ने बताया कि वृद्ध के साथ जालसाजी की गई थी और इसकी जानकारी जैसे लगी तो सबसे पहले थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई। सूदखोरों ने छोटे-छोटे से कर्ज की आड़ में वृद्ध की पासबुक, एटीएम और चैक जमा कर लिए। हर माह ब्याज देने के बाद भी वृद्ध कर्ज से मुक्त नहीं हो पाया। कभी-कभी तो सूदखोर वृद्ध को हर माह मिलने वाली पेंशन ही हजम कर जाते थे, जब वह उनके पास पैसे लेने जाता तो उसे एक हजार देकर चलता कर दिया जाता था।

 

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