ट्रेन में यात्रा के दौरान युवती से छेड़छाड़, शराब पीकर मुंह में उड़ाया सिगरेट का धुआं

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कटनी। विवेक शुक्ला ट्रेन में सफर के दौरान महिला यात्रियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की वारदातों को रोकने के लिए भले ही केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा कितनी भी हेल्पलाइन चालू कर रखी हो लेकिन जरुरत के वक्त इनसे माकूल मदद नहीं मिलती।

ऐसी ही एक परिस्थिति में शहर की एक बेटी साहस के साथ 36 घंटे तक मनचलों से अपने आप को बचाती रही। उसके परिजनों को खुद कानून को अपने हाथ में लेना पड़ा। जिसका वीडियो तो सोशल मीडिया तक जा पहुंचा है लेकिन आरपीएफ और जीआरपी को इसकी भनक तक नहीं है और ना ही दोनों थानों के प्रभारी इस पर अपनी जबान खोल रहे। बेंगलोर से कटनी की यात्री कर रही एक युवती के साथ में मनचलों द्वारा अभद्रता व छेड़छाड़ किए जाने का मामला सामने आया है।

युवती ने टोलफ्री नंबर पर शिकायत भी की लेकिन कोई मदद नहीं मिली। पीडि़ता की मानें तो लगभग 36 घंटे तक उसे मनचलों की यातना सहनी पड़ी। हैरानी की बात तो यह है इतना गंभीर मामला होने के बाद जीआरपी अनजान बनी हुई है। जानकारी के अनुसार कटनी की एक युवती बेंगलोर में रहती है। 20 मार्च को सूचना मिली कि पिता की तबियत खराब है, वह आनन-फानन में कटनी आने के लिए संघमित्रा एक्सप्रेस के जनरल कोच में बैठी।

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युवती के मुताबित बिहार के कुछ युवकों ने युवती को सीट दी और फिर कुछ देरबाद शराब और सिगरेट पीने लगे। सिगरेट का धुआं युवती के चेहरे में उड़ाने लगे और अश्लील बातें करने लगे। युवती ने मामले की जानकारी फोन पर परिजनों को दी। युवती ने कहा कि उसने आरपीएफ  से भी संपर्क किया तो वहां से कहा गया कि आप 182 में शिकायत दर्ज कराएं। टोलफ्री नंबर में शिकायत करने पर विजयवाड़ा में आरपीएफ  स्टॉफ  भी पहुंचा लेकिन आरपीएफ बदमाशों पर कार्रवाई करने की बजाय युवकों को समझाइश देकर चली गई। युवती ने कहा कि आरपीएफ  के इस रवैया से युवकों का हौंसला और बढ़ गया और वे डर गई। वह न तो खाना खा पाई और ना ही पानी पिया। घबराहट में वह परेशान होती रही। लगातार युवक उसके साथ बदसलूकी करते रहे।

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कटनी स्टेशन में हुई मनचले यात्रियों की आवभगत

घटना की जानकारी एक समाजसेवी को दी। 21 मार्च की शाम जब ट्रेन 36 घंटे बाद कटनी पहुंची तो परिजन व कुछ युवक कटनी स्टेशन पहुंचे। इस दौरान कुछ बदमाश युवकों को ट्रेन के नीचे उतारा और जमकर धुनाई की। काफी देर तक प्लेटफार्म में मामला मचा रहा। हैरानी की बात तो यह है कि परेशान परिजन स्टेशन पहुंचे, प्लेटफॉर्म में मारपीट हुई लेकिन जीआरपी व रेलवे अधिकारियों को भनक नहीं लगी। हैरानी की बात तो यह है कि कोविड के दौरान स्टेशन परिसर में कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति प्रवेश नहीं करता, काफी लोग बेटी के बचाव के लिए गए। आरपीएफ. जीआरपी ने ध्यान नहीं दिया तो मनचलों की आवभगत की और जिम्मेदार अनजान बने रहे। वहीं युवती ने बदनामी के डर से शिकायत न करने की बात कही है।

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इनका कहना है

सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी लगी है लेकिन पीडि़ता हमारे पास शिकायत करने नहीं आई। हमें लड़की का पता भी नहीं मिल रहा कि उससे बात करें। स्टेशन में मारपीट जैसी घटना हुई है इसकी भी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।

राकेश पटेल, जीआरपी प्रभारी

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