7 दिन में 12 देशों ने ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका वैक्सीन के इस्तेमाल को रोका, भारत में क्या स्थिति?

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एजेंसियां,नई दिल्ली लंदन | कोरोना महामारी से संघर्ष के बीच उम्मीद बनकर उभरी ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का इस्तेमाल पर बीते सात दिनों के अंदर 12 देशों ने रोक लगा दी है। सोमवार को जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन ने भी इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी। इसके अलावा नीदरलैंड ने भी ऐस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर रोक लगा दी है। दरअसल, वैक्सीन लगवाने के बाद खून के थक्के जमने के गंभीर मामले सामने आने की वजह से ऐसा किया गया है। भारत में भी ऐस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन टीकाकरण अभियान का अहम हिस्सा है। इसे सीरम इंस्टिट्यूट ने बनाया है।

इससे पहले आयरलैंड, बुल्गारिया, डेनमार्क, नार्वे और आइसलैंड ने खून के थक्के बनने को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद एहतियात के तौर पर इस टीके पर रोक लगा दी थी।

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ऐस्ट्राजेनेका का क्या है दावा?
ऐस्ट्राजेनेका कंपनी और यूरोपीय नियामकों का कहना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह बताता हो कि खून के थक्के बनने की घटनाएं इस टीके के कारण हुई हैं। एस्ट्रोजेनेका की ओर से कहा गया कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में करीब 1.7 करोड़ लोगों को यह टीका लगाया गया है और इस समूह में रक्त के थक्के जमने के 37 मामले हैं। यूरोपीय संघ की दवा नियामक एजेंसी ने एस्ट्राजेनेका के बारे में एक्सपर्ट्स के निष्कर्षों की समीक्षा के लिए गुरुवार को बैठक बुलाई है।

भारत में क्या है स्थिति?
एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड का कोविड-19 टीके का उत्पादन सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है और यह भारत में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत भारत में कोविशील्ड (एस्ट्राजेनेका/ऑक्सफोर्ड) और कोवैक्सिन (भारत बायोटेक) टीका लगाया जा रहा है। कुछ यूरोपीय देशों में शिकायत के बाद अब भारत ने भी इस वैक्सीन को लगाए जाने के बाद संभावित साइड इफेक्ट्स की समीक्षा किए जाने का फैसला लिया है। हालांकि, भारत में इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है।

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क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख वैज्ञानिक की सिफारिश है कि अभी भी कुछ लोगों में रक्त के थक्कों के बारे में चिंता के बावजूद एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का उपयोग जारी रखा जा सकता है। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के अधिकारी लोगों को डराना नही चाहते हैं, यहां तक ​​कि वैक्सीन के उपयोग की करीबी निगरानी भी जारी है। स्वामीनाथन ने कहा कि दुनिया भर के लोगों को विभिन्न प्रकार के कोरोनोवायरस वैक्सीन की कुछ 300 मिलियन यानी 30 करोड़ खुराक दी गई है, और कोविड वैक्सीन से जुड़ी हुई है मृत्यु के कोई दस्तावेज नहीं हैं।

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