न्यूटन के गति सिद्धांतों की ‘गुत्थियां’ सुलझाएंगी रामचरित मानस की चौपाइयां

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भोपाल। महान गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी, ज्योतिष व दार्शनिक सर आइजक न्यूटन ने भले ही वर्ष 1687 में अपने शोध पत्र ‘प्राकृतिक दर्शन के गणितीय सिद्धांत’ से गुरुत्वाकर्षण और गति के नियमों की गुत्थी सुलझा दी थी और यह भी साबित किया था कि सभी सिद्धांत प्रकृति से जुड़े हैं।

इसके बावजूद आज भी गणित, भौतिक और रसायन विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों की जटिलता बनी हुई है। राजधानी भोपाल में स्थित भोज मुक्‍त विश्वविद्यालय इन्हीं गुत्थियों के सिरे अब श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से खोलने जा रहा है।

दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विश्वविद्यालय ने सत्र 2021-22 से श्रीरामचरितमानस में एक नया डिप्लोमा कोर्स शुरू किया है। इस पाठ्यक्रम में श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों को भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान और पर्यावरण विज्ञान से जोड़कर पढ़ाया जाएगा, ताकि यह समझा जा सके कि सनातन धर्म भी विज्ञान आधारित है। पाठ्यक्रम की सामग्री उत्तर प्रदेश के अयोध्या शोध संस्थान की मदद से तैयार की जा रही है।

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इसके तहत विद्यार्थियों को श्रीराम नाम लिखे पत्थर समुद्र में तैर गए या रावण का पुष्पक विमान किस गति से उड़ान भरता था, आदि के बारे में बताया जाएगा। साथ ही श्रीराम के वनवास के दौरान प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यावरणीय विज्ञान के माध्यम से समझाया जाएगा।

31 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन

यह डिप्‍लोमा कोर्स विद्यार्थी 12वीं के बाद कभी भी कर सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्र की बाध्यता नहीं है। यह एक साल का डिप्लोमा कोर्स होगा। इसमें नामांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो 31 मार्च तक चलेगी।

इन चौपाइयों से विज्ञान को समझेंगे विद्यार्थी

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1- उत्तरकांड की ‘हिमगिरि कोटी अचल रघुवीरा, सिंधु कोटि सत राम गंभीरा’ चौपाई से भौतिकी की विभिन्न क्रियाओं को समझ सकते हैं। श्रीरामचरितमानस में वर्णित इस पूरी चौपाई में ईश्वरीय कण (कणों) की शक्ति को विस्तृत वर्णित किया गया है। इसमें विद्युतीय, चुंबकीय आकर्षण बलों और गुरुत्वाकर्षण एवं परिणामी बलों के बारे में समझाया गया है।

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