निकाय चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक, महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव बोले; अध्ययन करेंगे

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ग्वालियरः निकाय आरक्षण को लेकर बीते दिनों हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए एक याचिका दाखिल की गई थी. अब हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। तथा आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इस निर्णय पर  यशभारत से बातचीत करते हुए महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने बताया कि वह फ़ैसले का अध्ययन करेंगे। जिसके बाद सरकार कदम उठाएगी।

 

नोटिफिकेशन को दी गई थी चुनौती
बता दें कि 10 दिसंबर 2020 को निकाय चुनाव का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. जिसमें नगर परिषद, नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण भी तय किया गया है. जिसके खिलाफ मनवर्धन सिंह तोमर नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. इस याचिका में याचिकाकर्ता ने आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं होने की बात कही है. इस याचिका में याचिकाकर्ता ने डबरा नगर पालिका अध्यक्ष और इंदरगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष को लेकर दिए गए हाईकोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया है।

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याचिकाकर्ता का आरोप है कि अधिकांश नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष लंबे समय से एक ही वर्ग के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं. याचिका में मांग की गई है कि अन्य वर्ग को भी अध्यक्ष पद पर प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना चाहिए.

 

डबरा नगर पालिका और इंदरगढ़ नगर पंचायत का क्या था फैसला
बता दें कि हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने डबरा नगर पालिका और इंदरगढ़ नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के आरक्षण पर रोक लगा दी थी. दरअसल प्रशासन की तरफ से जारी किए गए नोटिफिकेशन में डबरा और इंदरगढ़ में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था. दोनों निकायों में अध्यक्ष पद साल 1994 से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित चल रहा था. इस संबंध में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगाते हुए रोटेशन प्रक्रिया अपनाने और दोबारा नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया था।

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