KATNI: खिरहनी ओव्हर ब्रिज के शिलालेखों से CM शिवराज, दादा रोहाणी सहित दिग्गजों के नाम पर पोत दिया पेंट, निगमायुक्त ने मानी भूल, कहा…

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कटनी। वैसे तो कई बार राजनीतिक दल शिलालेख में नाम को लेकर एक दूसरे से भिड़ते नजर आए हैं, अक्सर आरोप लगते हैं कि जिसकी सरकार उसके जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल तोड़ कर भी नाम अंकित किया जाता है लेकिन कटनी में मामला बिल्कुल अलग है यहां आज जो कुछ घटित हुआ वह आश्चर्य जनक किंतु सत्य है। अगर हम कहें कि एक शिलालेख जिस पर वर्तमान मुख्यमंत्री का नाम लिखा हो उसे उसी की सरकार के सरकारी नुमाइंदों ने पुतवा दिया तो आपको विश्वास नहीं होग, लेकिन कटनी में कुछ ऐसा ही हुआ। खिरहनी ओव्हर ब्रिज के दोनों तरफ लगे भूमि पूजन तथा उद्घाटन के शिलालेख गत दिवस अचानक गायब हो गये, पर ध्यान से देखा तो यह गायब नहीं थे, बल्कि इसके ऊपर शहर में स्वच्छता की खातिर पेंटिंग कर रही एक निजी कंपनी की मेहरबानी से रंग पोत दिया गया शायद भोपाल की जिस कम्पनी को स्वछता की खातिर शहर में पेंटिंग बनाने का जिम्मा सौंपा गया है उसे इस रंग बिरंगी स्वच्छता में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम लिखा यह काला पत्थर भा नहीं रहा था?

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खबर के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन फिर से लिखाया जा रहा नाम

यूं तो सूबे में करीब 14 महीने सत्ता बदली तो भी किसी के मन मे इस शिलालेख को पोतवाने का खयाल नहीं आया यह विचार उस वक्त आया जब पुनः प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार काबिज हो गई और चौथी बार शिवराज सिंह ही सीएम भी बन गये। खैर स्वछता के लिए प्रधानमंत्री जी की पहल पर ऐसे कितने ही नाम कुर्बान, पर कम से कम दिवंगत दादा ईश्वर दास रोहाणी पर तो संवेदनशील बना जा सकता था। देखा जाए तो कटनी जिले ही नहीं यह तो पूरे प्रदेश का ऐसा अनोखा मामला होगा जहां सत्ता के मुखिया के नाम पर ही ब्रश चल गया। आपको बता दें कि स्वच्छता ओर शहर को सुंदर बनाने की खातिर भोपाल की किसी कम्पनी को शहर में सजावट पेंटिंग स्लोगन लिखने का ठेका दिया गया है। यूं तो कम्पनी काम ठीक ठाक कर रही है पर न मालूम क्यों इसे ओव्हरब्रिज में लिखे सीएम और भाजपा के जनप्रतिनिधियों के नाम इतना नागवार क्यों गुजरा की बिना एक पल की देर किए इस पर फटाफट ब्रश चला दिया गया।

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निगमायुक्त ने मानी भूल, कहा- ठेका कंपनी की गलती को सुधारा

इस मसले पर निगमायुक्त सत्येंद्र धाकरे से यशभारत ने बात की तथा ध्यानाकष्ट कराया तो उन्होंने स्वीकार किया कि मा. मुख्यमंत्री समेत सभी शिलालेखों पर पेंट नहीं किया जाना था। यह पेटिंग करने वाले कर्मियों की भूल थी जिसे खबर मिलते ही दुरूस्त कराने के लिए कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि इसके पीछे किसी की भावना को ठेस पहुंचाने जैया कोई उद्देश्य नहीं था।

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