बंगाल में ISF संग गठबंधन को लेकर अपनों से घिरी कांग्रेस, अब कर रही रणनीति में बदलाव

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने लेफ्ट-आईएसएफ के साथ गठबंधन किया है। हालांकि, कांग्रेस की अंदरूनी रस्साकशी इस गठबंधन पर भी असर डालती नजर आ रही है और अब पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव कर लिया है। कांग्रेस अपने ही गठबंधन में शामिल अब्बास सिद्दीकी के इंडियन सेक्युलर फ्रंट से दूरी बनाने की कोशिश में है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उसका आईएसएफ से कोई संबंध नहीं और यह फ्रंट लेफ्ट का सहयोगी है।

कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने 27 मार्च से शुरू होने जा रहे पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए पहली बार गठबंधन किया है। लेकिन इस गठबंधन में आईएसफ को शमिल करना और फिर सीट शेयरिंग में भी समझौता करने की वजह से कांग्रेस को किरकिरी झेलनी पड़ी है जिसके बाद उसने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।

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पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस करीब 90 सीटों पर लड़ेगी और आईएसएफ के संस्थापक सिद्दीकी के साथ इन सीटों पर कोई तालमेल नहीं होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को जितनी सीटें चाहिए थीं, वह मिल गईं। लेफ्ट के साथ एक बड़ा मोर्चा, एक सेक्युलर मोर्चा बना है।’

नाम न जाहिर करने की शर्त पर दो कांग्रेस नेताओं ने बताया कि जहां कांग्रेस का एक धड़ा सिद्दीकी के साथ तालमेल बैठाने को राजी है तो वहीं प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी इसके खिलाफ हैं। 28 फरवरी को कोलकाता में लेफ्ट की मेगा रैली के दौरान सिद्दीकी और चौधरी ने एक-दूसरे से बात तक नहीं की। इतना ही नहीं सिद्दीकी के मंच पर आते समय अधीर रंजन चौधरी को अपना भाषण तक रोकना पड़ा गया था।

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अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शीदाबाद से पांच बार सांसद रहे हैं। चौधरी के समर्थकों का कहना है कि अपने पुराने गढ़ में किसी और पार्टी के साथ गठबंधन करने की कोई वजह नहीं है। कोलकाता में मौजूद रहने के बावजूद सोमवार को गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर हुई आखिरी बैठक में भी शामिल नहीं हुए।

कोलकाता और दिल्ली में पार्टी की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई बैठक में भी कांग्रेस नेताओं ने चुनाव अभियान के दौरान बेरोजगारी और बंगाल की अर्थव्यवस्था पर फोकस करने को कहा। पार्टी आईएसएफ की धार्मिक एजेंडे के साथ सहज नहीं है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘आईएसएफ के साथ कोई संयुक्त अभियान नहीं होगा। न तो हम उनके लिए वोट मांगेंगे और न ही उनसे हमें समर्थन करने को कहेंगे।’

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