डांस, पुश-अप्स, चाय बागान में पत्तियां तोड़ना… क्या इंदिरा गांधी के नक्शे-कदम पर चल रहे हैं राहुल-प्रियंका?

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उत्तर-पूर्वी असम के लखीमपुर से देश के दक्षिणी किनारे कन्याकुमारी के बीच दूरी तीन हजार किलोमीटर से अधिक की है, लेकिन बीते दो दिनों में दोनों ही जगहों में एक जैसी सियासत देखने को मिली है।

सोमवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कन्याकुमारी में थे, तो वहीं उनकी बहन और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी असम के दौरे पर हैं। दोनों ने ही पारंपरिक राजनीति से हटते हुए स्थानीय लोगों के साथ डांस किया।

वहीं, मंगलवार को प्रियंका गांधी ने असम में चाय बागान के मजदूरों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ती दिखीं। उन्होंने असम के बिस्वनाथ में सिर पर टोकरी लगाए हुए चाय की पत्तियों को तोड़ा। इसके जरिए से उन्होंने असम में तीन चरणों में 27 मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी संख्या में वोटर्स को कांग्रेस की ओर लाने की कोशिश की।

पिछले कुछ दिनों में सामने आई राहुल और प्रियंका की यह कैंपेन स्टाइल कुछ हद तक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलती-जुलती दिख रही है। इंदिरा गांधी भी कई दफे जनता से सीधे संवाद करती हुई दिखाई देती थीं।

कांग्रेस के टॉप कैंपेनर के रूप में पहचाने जाने वाले राहुल गांधी भी अपने पिछले कुछ दौरे पर नए अवतार में दिखाई दे रहे हैं। वे लोगों से कनेक्ट करने के लिए नए आइडियाज के साथ आ रहे हैं।

राहुल ने सोमवार को सेंट जोसेफ मेट्रीक्यूलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल में पुश-अप्स करके दिखाए। वहां पढ़ने वाली छात्रा मेरोलीन शेनिघा ने राहुल गांधी को पुश-अप्स करने की चुनौती दी थी, जिसके बाद उन्होंने नौ सेकंड में 14 बार पुश-अप्स किए। इसके अलावा, एक हाथ से भी राहुल ने पुश-अप किया।

कन्याकुमारी के स्कूल में राहुल ने न सिर्फ पुश-अप किए, बल्कि उन्होंने जापान का मार्शल आर्ट एकिडो भी करके दिखाया। उन्होंने बाद में स्कूल की कुछ छात्राओं के साथ डांस भी किया। कुछ दिनों पहले केरल में राहुल गांधी ने मछुआरों के साथ समुद्र में तैराकी भी करके दिखाई थी। इस दौरान की उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई, जिसमें उनके ऐब्स दिखाई दे रहे थे। कई कांग्रेस नेताओं समेत ट्विटर यूजर्स काफी समय तक राहुल गांधी की फिटनेस पर उनकी प्रशंसा करते रहे। वायनाड से सांसद राहुल ग्रामीणों के साथ मशरूम बिरयानी भी पकाते हुए नजर आए थे। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि जब राहुल उन्हीं लोगों की तरह ढल गए हों, जहां का वे दौरा कर रहे हों। जब यूपीए की सरकार थी, तब उन्होंने उत्तर प्रदेश में मनरेगा वर्कर्स के साथ काम किया था।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि राहुल गांधी और पार्टी के अन्य शीर्ष नेता ऐसे कैंपेन में इस वजह से हिस्सा ले रहे हैं, ताकि जनता और पार्टी के बनी बीच की दूरी को कम किया जा सके या फिर खत्म किया जा सके। नेता सिर्फ बड़ी रैलियों या फिर रोड शो को संबोधित करने तक ही सीमित नहीं दिखाई दे रहे हैं, बल्कि गांधी परिवार लोगों के साथ और करीब से बात कर रहा है या यूं कहें कि जनता से सीधे संवाद करने में रुचि दिखा रहा।

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