बंगाल में गठबंधन पर कांग्रेस में मतभेद:ISF से अलायंस पर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सवाल उठाया.

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कांग्रेस के सीनियर लीडर आनंद शर्मा ने पश्चिम बंगाल में इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के साथ गठबंधन करने पर सवाल उठाया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि ऐसा करना कांग्रेस की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरू के सेकुलरिज्म के खिलाफ है। आनंद शर्मा की टिप्पणी पर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हम एक राज्य के प्रभारी हैं। बिना किसी अनुमति के अपने दम पर कोई फैसला नहीं लेते। यह फैसला हाईकमान का है।

गठबंधन के नेताओं ने रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में बड़ी रैली की थी। इस रैली में कांग्रेस से अधीर रंजन चौधरी शामिल हुए थे। शर्मा ने कहा कि रैली में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की मौजूदगी शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि पार्टी सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने में सिलेक्टिव नहीं हो सकती। धर्म और रंग की परवाह किए बिना इसे अपनी हर बात में शामिल करना चाहिए।

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कांग्रेस ने लेफ्ट और ISF से किया गठजोड़
कांग्रेस बंगाल में ISF के अलावा लेफ्ट के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। ISF को 30 सीटें दी गई हैं। इस पर शर्मा ने कहा कि ISF जैसी कट्टरपंथी पार्टी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर चर्चा की जानी चाहिए थी और इस फैसले को कांग्रेस वर्किंग कमेटी से अप्रूव कराना चाहिए था। CWC पार्टी से जुड़े फैसले लेने वाली सबसे बड़ी बॉडी है। यही पार्टी के अहम फैसले लेती है। शर्मा CWC के सदस्य और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं।

कांग्रेस 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी
कांग्रेस और लेफ्ट के बीच सोमवार को सीटों पर समझौता हो गया। अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि कांग्रेस 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रत्याशियों की लिस्ट 2 दिन में जारी कर दी जाएगी। अधीर रंजन ने बताया कि हमने शुरुआत में 130 सीट की मांग की थी। हम RJD और NCP के लिए सीटें रखना चाहते थे। अब हमें उनसे सीटें बांटने की जरूरत नहीं है, लेकिन हमारा ऑफर दूसरी पार्टियों के लिए खुला है।

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कभी ममता के करीबी थे ISF के संरक्षक
इंडियन सेकुलर फ्रंट बंगाल की सबसे नई-नवेली पार्टी है। इसके मुख्य संरक्षक 34 साल पीरजादा अब्बास सिद्दीकी हैं। वह हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ से जुड़े परिवार से ताल्लुक रखते हैं। यह अजमेर शरीफ के बाद देश की दूसरी सबसे पवित्र मजार मानी जाती है। पीरजादा की मुस्लिम वोटर्स पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। वह कभी मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी थे। बाद में नाराज होकर उन्होंने नई पार्टी बना ली।

पहले कहा था- उम्र ढलने के साथ पार्टी को कमजोर होते नहीं देखना चाहते​
पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा उन 23 नेताओं में से हैं, जो कांग्रेस की लीडरशिप पर सवाल उठा चुके हैं। इन नेताओं को G-23 नाम दिया गया है। इस ग्रुप ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखकर पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की मांग की थी।

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लीडरशिप से नाराज पार्टी के सीनियर लीडर्स हाल में जम्मू में जुटे थे। इस दौरान कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस कमजोर हो रही है, हम इसे मजबूत करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। उन्होंने पार्टी की तरफ से गुलाम नबी आजाद के अनुभव का फायदा न लेने की बात भी कही।

वहीं, आनंद शर्मा ने कहा था कि हम पार्टी की भलाई के लिए आवाज उठा रहे हैं। नई पीढ़ी को पार्टी से कनेक्ट होना चाहिए। हमने कांग्रेस के अच्छे दिन देखे हैं। अब हम अपनी उम्र ढलने के साथ पार्टी को कमजोर होते नहीं देखना चाहते।

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