Arunoday 2021: पत्रकारिता के माध्यम जरूर बदल रहे पर मापदंड वही-अरुणोदय पुरुस्कार समारोह में बोले इंडियाTV के MD कार्तिकेय शर्मा

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जबलपुर। Arunoday 2021 अरुणोदय यशभारत निवास शताब्दिपुरम में शनिवार 20 फरवरी की शाम को आयोजित पत्रकार अरुण शुक्ला स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार, श्रीमती माया शुक्ला स्मृति महिला पत्रकारिता एवं श्रीमती सुशीला शुक्ला स्मृति श्रेष्ठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार समारोह अरुणोदय 2021 में नगर के चुनिंदा पत्रकारों व श्रेष्ठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शॉल श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्माननिधि से सम्मानित और पुरस्कृत किया गया।

भव्यता व गरिमामय माहौल में कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्तिवाचन के बीच अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।अतिथियों ने स्व. अरुण शुक्ला एव श्रीमती सुशीला शुक्ला के तैल चित्र पर भी माल्यार्पण कर उनको आदरांजलि दी।

मुख्यअतिथि काॢतकेय शर्मा मैंनेजिंग डायरेक्टर इंडिया न्यूज व विवेक कृष्ण तन्खा राज्यसभा सांसद ने वर्चुअल उद्बोधन दिया। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संजय शर्मा विधायक, भगवत सिंह चौहान पुलिस महानिरीक्षक, कर्मवीर शर्मा कलेक्टर, सिद्धार्थ बहुगुणा पुलिस अधीक्षक, संदीप जीआर अतिरिक्त कलेक्टर ,अनूप कुमार सिंह निगमायुक्त एवं पी के बिसेन कुलपति जेएनकेविवि विराजमान थे। अतिथियों व चयन समिति को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने कहा कि सच को सामने लाना आसान काम नहीं है लेकिन पत्रकार इस काम को बखूबी निभा रहे हैं पत्रकार को हर चुनौती से निपटने में सक्षम होना चाहिए। खोज परक समाचार निकाल कर उसे निर्भीकता के साथ पाठकों तक पहुंचना ही असल में पत्रकारिता है। उन्होंने कहा कि आशीष शुक्ला जैसे बेटा आज की जरूरत है। जिन्होंने अपने माता -पिता को याद को इस स्मृति शेष आयोजन से संजोये रखा।

वर्ष 2021 के लिए ये हुए सम्मानित व पुरस्कृत
वरिष्ठ पत्रकारिता सम्मान (लाइफटाईम अचिव मेंट अवार्ड)- अजय पाठक (हिन्दी एक्सप्रेस)
युवा पत्रकार सम्मान-समर मल्होत्रा (दैनिक भास्कर), राहुल मिश्रा (पत्रिका), डॉ प्रमोद पांडे (नई दुनिया) विनोद मिश्रा (प्रदेश टुडे)।
श्रीमती माया देवी स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार – सुरभि तिवारी (आकाशवाणी )
इलेक्ट्रानिक मीडिया – विश्वजीत सिंह (ईटीवी )
श्रीमती सुशीला शुक्ला स्मृति श्रेष्ठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार श्रीमती सरिता मिश्रा व अनिता प्यासी को शॉल श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्माननिधि से सम्मानित और पुरस्कृत किया गया ।

अतिथियों को स्वागत आशीष शुक्ला, अखिलेश शुक्ल,पर्व जायसवाल,राजुल करसोलिया अवधेश कटारे,अभिषेक शुक्ला-, अजेय शुक्ला,अर्पित शुक्ला, अंकित शुक्ला, अस्तित्व शुक्ला ने किया।जवन की

संग्रह “इम्तिहान” लोकार्पित

संस्कारधानी में कोरोना काल के कठिन इम्तिहान में साहसिक पत्रकारिता के साथ वो खट्टी मीठी यादें जिन्हें आप जरूर याद करना चाहेंगे। जनता कर्फ्यू से अनलॉक तक की इन्ही यादों का संग्रह – जीवन की कसौटी का इम्तिहान पत्रिका का लोकार्पण भी अतिथियों के द्वारा आज अरुणोदय 2021 समारोह में किया गया। जिसका संकलन यशभारत सम्पादकीय टीम के सदस्य आशुतोष शुक्ल, तथा उषा पमनानी ने किया।

डायरेक्टरी अरुणोदय 2021 का विमोचन
अतिथियों ने समारोह के समापन पर यशभारत की टेलीफोन डायरेक्टरी अरुणोदय 2021 का विमोचन किया। इस मौके पर सम्मानीय अतिथियों को स्मृति चिन्ह आयोजन समिति के सदस्यों के द्वारा भेंट किया

पत्रकारिता के माध्यम जरूर बदल रहे पर पत्रकारिता के मापदंड वही-कार्तिकेय शर्मा
वर्चअल उदबोधन में इंडिया न्यूज के एमडी कार्तिकेय शर्मा इंडिया न्यूज के एमडी कार्तिकेय शर्मा ने अरुण शुक्ला पत्रकारिता सम्मान समारोह 2021 मैं मुख्य अतिथि के रूप में अपने वर्चअल उदबोधन में कहा कि सच को सामने लाना आसान काम नहीं है लेकिन पत्रकार इस काम को बखूबी निभा रहे हैं ।समय के साथ पत्रकारिता के माध्यम जरूर बदल रहे हैं। लेकिन पत्रकारिता के मापदंड वही है. यही पत्रकारिता की सबसे बड़ी देन और उपलब्धि है। ।श्री शर्मा ने आगे कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि पत्रकारिता उनकी कर्मभूमि है तथा जबलपुर उनकी जन्मभूमि है आज पत्रकार कठिन परिस्थितियों में काम कर रहा है। वह दुनिया भर को तो सामने लाता है। किंतु स्वयं पीछे रहता है। ऐसे में युवा एवं निर्भीक पत्रकारों का सम्मान करना नैतिक कार्य है। जिसे पत्रकार आशीष शुक्ला बखूबी कर रहे हैं ।

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जबलपुर में भी महिला पत्रकारों को बराबरी का हक देना चाहिए -विवेक तन्खा
प्रमुख अतिथि राज्यसभा सदस्य विवेक कृष्ण तन्खा ने भी अपने वर्चुअल उदबोधन में कार्यक्रम में साक्षात रूप से उपस्थित ना होने पर अफसोस जताया और कहा कि वे अस्वस्थ हैं और और दिल्ली में हैं। आज ही उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया है। भगवान का शुक्र है कि वे निगेटिव पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पत्रकारिता आंदोलन नहीं ,कारपोरेट बन गई है। खासकर राष्ट्रीय पत्रकारिता राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता व्यूज की जगह न्यूज़ दे रही है। जबकि समाज पत्रकारों से न्यूज़ चाहता है। उन्होंने इस मामले में जबलपुर की पत्रकारिता को दिल्ली से बेहतर बताया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि यहां पत्रकार निष्पक्ष रुप से निर्भीकता के साथ पत्रकारिता कर रहे हैं। हां लेकिन दिल्ली में महिला पत्रकार की संख्या बहुत है। जबलपुर में भी महिला पत्रकारों को तेजी से सामने लाकर बराबरी का हक देना चाहिए । श्री तन्खा ने कार्यक्रम एवं उनके संयोजक आशीष शुक्ला की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आशीष जी ने पिछले 26 सालों से पत्रकारों का सम्मान कर एक नई पीढ़ी प्रदान की है। उनका पत्रकारिता पुरस्कार निष्पक्ष रहता है ।चूंकि सम्मानितों का चयन का चयन वरिष्ठ पत्रकारों की टीम करती है। जो अलग-अलग अखबारों से होते हैं। अत: सम्मान उन्हीं को मिलता है जो इसके वास्तविक हकदार हैं। श्री तनखा ने मुख्य अतिथि कार्तिकेय शर्मा की भी तारीफ की और इसे गौरवपूर्ण बताया कि वे उनकी जन्मभूमि जबलपुर है। उन्होंने श्री शर्मा को शुभकामनाएं देते हुए यह भी कहा कि वे एक दिन पूरी दुनिया में जबलपुर का नाम रोशन करेंगे।

यह आयोजन अब समाज के हर वर्ग का: आशीष शुक्ला
आशीष शुक्ला ने स्वागत भाषण में कहा कि पत्रकार सही दिशा में सही खबर पहुंचा रहा। 1996 में बहुत कम लोगों को लेकर यह पुरस्कार सम्मान समारोह शुरू किया था। आज कार्यक्रम 26 वे वर्ष हुआ। यह समारोह हमेशा चलता रहे ऐसी कोशिश रहेगी । यह आयोजन अब सिर्फ शुक्ला परिवार का आयोजन नहीं रह गया बल्कि समाज के हर वर्ग का है। ऐसा कार्यक्रम हमने कहीं नहीं देखा था जिसमेें खुलकर पत्रकारों की हौसला अफजाई की जाती हो। एक 3 घण्टे की मशक्कत के बाद चयन समिति ने नाम तय किये। उन्होंने कोरोना काल में बिछ़ुड़े वरिष्ठ पत्रकार साथियों गिरीश चौबे, अजित वर्मा, सुशील तिवारी, व अपने साथी गोपाल अवस्थी, जहीर अंसारी के सम्मान श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए 2 मिनट का मौन भी रखाया।

मीडिया की रचनात्मकता लोकतंत्र को सशक्त बनाती है- विधायक संजय शर्मा
विधायक संजय शर्मा ने कहा कि पत्रकारों का सम्मान व पुरस्कार यह जो कार्यक्रम आयोजित हुआ है इसमें शामिल होकर मैं बड़ा गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मुझे जानकारी मिली की इस कार्यक्रम का आयोजन लगभग ढाई दशकों से हो रहा है । जिनकी याद में यह कार्यक्रम आयोजित होता है वे है पत्रकार अरुण शुक्ला । उन के दौर की पत्रकारिता का एक अलग गौरव था जिसे उन्होंने जीया और उनके दिखाए रास्ते पर चलने के लिए आशीष शुक्ला यह कार्यक्रम आयोजित करते हैं । जो कहीं ना कहीं युवा पत्रकारों को एक प्रेरणा देता है। जबकि हम आज पत्रकारों के बीच में है तो मैं एक बात कहना चाहता हूं कि वर्तमान समय में आरोप-प्रत्यारोप तो हर किसी पर लगते हैं पत्रकार भी इससे अछूते नहीं है। लेकिन मैं उनकी समस्या समझ सकता हूं जबकि उन्हें पत्रकार धर्म का पालन करना है तो एक खबर किसी को अच्छी लगेगी तो किसी को चुभने वाली भी होगी। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप लगना तो निश्चित है। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की स्वतंत्रता और मीडिया की रचनात्मकता लोकतंत्र को सशक्त बनाती है जैसे अच्छी शासन व्यवस्था में विपक्ष का होना जरूरी है वैसे ही सत्ता पक्ष को रचनात्मक कार्यों को करने के लिए प्रेरित करना और विपक्ष को सदैव सजग रखना पत्रकारों का दायित्व है। हमारे देश के पत्रकार इस काम को बखूबी कर रहे हैं । उन्होंने आशीष शुक्ला को साधुवाद देते हुए कहा कि कि वे ऐसा कार्यक्रम दो दशक से करते आ रहे हैं जो पत्रकारों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। हम 10 बुराई करें पर अच्छाई को भी अखबार के किसी कॉलम में स्थान दे।

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समाज के उत्थान में पत्रकारों की भूमिका सराहनीय: आईजी श्री चौहान
पुलिस महानिरीक्षक भगवत सिंह चौहान ने कहा कि आज आशीष शुक्ला द्वारा माता पिता की स्मृति में यह गरिमामय समारोह आयोजित किया जा रहा। खुशी के बात है कि इतना बड़े आयोजन में वर्ष भर अच्छा काम करने वाले पत्रकारों का सम्मान होता है। पत्रकारों के लिए ऐसे बहुत ही कम आयोजन होते है। आशीष की यह सोच सराहनीय है। समाज के उत्थान, समाज को जागरूक करने के लिए पत्रकारों की भूमिका सराहनीय। कोरोना काल में जब लोग घरों से निकलने में डर रहे थे तब पत्रकार भाई गली-मोहल्लों में बेखौफ रिपोर्टिंग कर रहे थे। सतयुग में जैसे नारद मुनि कहीं भी प्रगट हो जाते थे वैसे ही आज पत्रकार हर जगह प्रगट हो जाते। आजादी के आंदोलन में भी प्रेस की प्रभावी भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने भी अखबार निकालकर देश को जागरूक किया था। आज हम गौरव महसूस कर रहे कि उसे मूर्धन्य पत्रकारों का विशेष मंच से सम्मान कर रहे। पुरस्कार के लिए चयनित पत्रकारों को बधाई। हमने देखा कि आलोचनाएं अधिक होती है। अगर हमें अपने शहर और प्रदेश को आगे बढ़ाना है तो अच्छी बातों को भी सामने लाना होगा।

कोरोना काल में पत्रकारों नेे अपना धर्म निभाया -कलेक्टर कर्मवीर शर्मा
कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने अपने उद़्बोधन में कहा कि जिन्हें ये सम्मान प्राप्त हो रहा उन्हें बधाई। मुझे बताया गया तो मैंने इच्छा जागृत की जरूर ही इस आयोजन में आऊंगा। यह कार्यक्रम साल दर साल कीर्तिमान स्थापित कर रहा। पत्रकारों के प्रस्तुतिकरण का तरीका बदल रहा। जबलपुर की पत्रकारिता तथ्यपरक, पारदर्शिता और सटीक है। यह पत्रकारों की गंभीरता का द्योतक है। उनकी मेहनत और लगन ही उन्हें यह सम्मान दिलाती। यह क्षेत्र हमेशा ही अछूता रहता है, इसमें सम्मान देना वाकई सराहनीय है। कोरोना काल में अपने जीवन की परवाह किये बगैर पत्रकारों ने अपना धर्म निभाया। हमें भी इससे सम्बल मिला। हमें उपयोगी जानकारियों से कोरोना से निपटने में मदद मिली। जीवंत सम्पर्क मीडिया के साथियों से रहे ऐसी अपेक्षा। सभी पत्रकारों का आभार जिन्होंने अपने सिद्धांत कायम रखते हुए पत्रकारिता की।

पत्रकारों का दायित्व पुलिस जैसा ही- पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि आज पत्रकारों का दिन है। आशीष शुक्ला का धन्यवाद की जिन्होंने हमें मौका दिया कि हम पत्रकारों का अभिनंदन कर सकें। उन्होंने कहा कि पत्रकार हमेशा दूसरों की सराहना करते है पर उनकी सराहना नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि 26 साल गुजर जाने के बाद भी आशीष अपने माता-पिता को याद करते हैं जो आधुनिक युग के श्रवण कुमार से कम नहीं हैं उन्होंने कहा कि सती प्रथा हो या अन्य गलत परंपराएं उनके प्रति लोगों को जागरूक करने का काम उस दौर में भी पत्रकारिता करती थी। ब्रिटिश सरकार ने पत्रकारिता को कुचलने का काम किया लेकिन सफल नहीं हो पाए। पत्रकारों का दायित्व पुलिस जैसा ही है 24 घण्टे डयूटी।फर्क सिर्फ वर्दी का है। हम पत्रकारों को पुलिस का भाई ही मानते है। अगर हमने किसी गुंडे के खिलाफ कोई कार्यवाही की उसे जनता तक ले जाने में मीडिया का हाथ होता है। ट्रैफिक को लेकर जागरूकता में भी मीडिया का योगदान अहम है। उन्होंने उन वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धांजलि दी जिनका कोरोना काल में निधन हो गया । उन्होंने कहा कि जबलपुर की पत्रकारिता को सलाम।

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आशीष को आशीष: बिसेन
जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पी.के. बिसेन ने कहा कि आज यहां तीन पीढिय़ां उपस्थित हैं। इनमें से एक पीढ़ी को ईश्वर से शिकायत है तो दूसरी पीढ़ी कामना करती है। तीसरी पीढ़ी ईश्वर का धन्यवाद देती है। हम जैसे बुजुर्ग पीढ़ी के लोग जिनकी अब संतान नहीं हो सकती, वे ईश्वर से शिकायत करते हैं कि हमें आशीष शुक्ला जैसी संतान क्यों नहीं दी। दूसरी पीढ़ी ईश्वर से कामना करती है कि हे ईश्वर हमें आशीष शुक्ला जैसी संतान दे जो अपने माता पिता का नाम जिंदगी भर रोशन करे और एक पीढ़ी वह है जो आशीष शुक्ला से सम्मान पाकर धन्य होती है। जाबालि ऋ षि की तपोभूमि, संस्कारधानी। जब इसे कहा जाता है तब चिंतन। आचार्य विनोबा भावे जी ने क्या बात देखी थी जो जबलपुर को संस्कारधानी कहा था, शायद आशीष शुक्ला जैसे व्यक्ति से ही उनकी मुलाकात हुई होगी। जिनमे संस्कार और समर्पण एक साथ है।आयोजन में चिर-परिचित शायराना अंदाज में राहुल पाठक ने कुशल मंच संचालन कर लोगों की तालियां बटोरीं।

आभार प्रदर्शन
डॉ रश्मि शुक्ला ने अतिथियों का आभार जताते हुए कहा कि आप लोगों की गरिमामय उपस्थिति सभी पत्रकारों में एक नयी ऊर्जा का संचार कर गयी। उन्होंने उपस्थित जनों का भी आभार जताया कि जिन्होंने इस आयोजन में आकर हमें संबल प्रदान किया।

श्रेष्ठ पत्रकारों का चयन प्रतिष्ठित सम्पादकों की चयन समिति में हिन्दी एक्सप्रेस के संपादक रविन्द्र वाजपेयी, दैनिक भास्कर के समाचार संपादक डॉ पंकज शुक्ला, नई दुनिया के संपादक कमलेश पांडे,पत्रिका के संपादक गोविंद ठाकरे, प्रदेश टुडे के संपादक पंकज पटेरिया, यशभारत के संपादकीय प्रभारी प्रवीण अग्रहरि शामिल हैं।

कार्यक्रम में मीडिया जगत के विशिष्ट जनों के साथ ही बड़ी संख्या में प्रेस कर्मी जनप्रतिनिधि राजनैतिक, सामाजिक और व्यवसायिक संगठनों के लोग मौजूद रहे। जैन पंचायत सभा के अध्यक्ष सतेन्द्र जैन जुग्गू, अभिलाष पांडे , डॉ राजेश धीरावाणी,डॉ पवन स्थापक, श्री ददरया ,शैलेन्द्र सिंह ठाकुर कमलेश रावत, आलोक मिश्रा, जगत बहादुर सिंह अन्नू सतीश उपाध्याय, सतीश तिवारी, पंकज पाण्डेय, डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, डॉ. आनंद सिंह राणा, रंजीत पटेल, कटनी यशभारत से स्थानीय सम्पादक आशीष सोनी, आशुतोष शुक्ला, विवेक शुक्ला, उषा पमनानी, रोहित सेन व प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।

आयोजन समिति में शरद जैन पूर्वमंत्री, अवधेश कटारे, उदयभान सिंह,पर्वजायसवाल,राजुल करसोलिया,आदित्य पंडित, अखिलेश शुक्ला, आशीष शुक्ला, अभिषेक शुक्ला, अजेय शुक्ला, सौरभ शुक्ला, अर्पित शुक्ला, अंकित शुक्ला, रुझान, प्रखर,मोनिका, साक्षी, अस्तित्व, अर्थ, सांझ ,यशिका ईशानी शामिल रहे।

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