बजट में 400 करोड़ की स्वीकृति के बाद कटनी का यह ग्रेड सेपरेटर रेल बायपास ब्रिज के चर्चे हैं पूरे देश में, क्या है ये उड़ता जंक्शन जनिये

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जबलपुर । कटनी से निकलने वाले रेल मार्गों पर ट्रेनें जल्द ही ट्रेनों की लेट लतीफी से यात्रियों को राहत मिल जाएगी। उन्हें जाम के झाम से बचाने के लिए उड़ता जंक्शन (ग्रेड सेपरेटर बायपास) बनाया जाएगा। इससे ट्रेनों के इंतजार में रेलवे फाटकों पर फंस जाने वाले सड़क यात्रियों का वक्त भी बचेगा। आम बजट में पश्चिम मध्य रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 400 करोड़ का बजट स्वीकृत कर लिया है। परियोजना का कार्य शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है।

कई सुपर फास्ट ट्रेनें भी बायपास से ही गुजरेंगी : न्यू कटनी जंक्शन में बढ़ते गाड़ियों के दवाब को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने यहां पर ग्रेड सेपरेटर ब्रिज बनाने के लिए 400 करोड़ की मंजूरी दे दी है।

इस ब्रिज के बनने के बाद जितनी भी गुड्स ट्रेनें हैं उन्हें इसी बायपास से निकाला जाएगा जबकि ऐसी यात्री ट्रेनें जिन्हें कटनी में रुकना है वे ही स्टेशन में आएंगी। कई सुपर फास्ट ट्रेनें भी बायपास से ही गुजरेंगी। विदित हो कि वर्तमान में कटनी जंक्शन से दिनभर में करीब 150 ट्रेनें और दर्जन भर से ज्यादा मालगाड़ियां गुजरती हैं। कोरोनाकाल में यह संख्या 200 के पार रही। इस कारण स्टेशन में यातायात का दबाव बढ़ गया है और गुड्स ट्रेनों को आगे बढ़ाने के फेर में यात्री ट्रेनों को काफी देर तक स्टेशन में खड़ा रखा जाता है जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। ट्रेन भी बेवजह लेट होती हैं।

यह होगी खासियत :

  • 14 किमी लंबे इस ब्रिज से गुजरेंगी दो लाइन।

  • 7 किमी की होगी दूसरी लाइन।

  • 21 किमी लंबा ब्रिज बनेगा दोनों लाइन के लिए।

  • 17 रेलवे जोन हैं, लेकिन देश में इतना लंबा बायपास कहीं नहीं है।

  • 5 साल के भीतर बनाकर तैयार किया जाएगा।

  • 4.62 किमी लंबा ब्रिज अभी दक्षिण राज्य केरल में इडापल्ली के वलरपदम में बना है।

  • डिजिटल सिंग्नल होने के साथ इसके रखरखाव आनलाइन होगा।

  • ब्रिज के खंभों पर ट्रेन का पड़ने वाला प्रेशर हर ट्रेन के गुजरने पर नापा जाएगा।

  • इस ब्रिज को कटनी न्यू जंक्शन के ऊपर से निकालते ही बायपास बनाया जाएगा।

  • ब्रिज के नीचे स्टेशन और दूसरी लाइन होगी, इसमें इसका कोई प्रभाव नहीं होगा।

  • यह देश ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे लंबा ब्रिज होगा।

 80 किमी होगी गुड्स ट्रेन की रफ्तार : रेलवे बोर्ड ने पैसेंजर ट्रेन से ज्यादा गुड्स ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया है। अभी तक गुड्स ट्रेन की औसतन रफ्तार 20 से 25 किमी प्रति घंटे होती थी, लेकिन रेलवे बोर्ड ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें इनकी औसतन रफ्तार 80 किमी प्रति घंटे रखा है। लगभग सभी गुड्स ट्रेनों को इसी बायपास से गुजारने की योजना है।

क्या है उड़ता जंक्शन : रेलगाड़ियों के आवागमन में देरी से बचने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे अब ग्रेड सेपरेटर जैसा विशेष प्रोजेक्ट लेकर आया है। इस परियोजना को उड़ता जंक्शन के नाम से भी पुकारा जाता है। एक रेलवे अधिकारी के मुताबिक, ग्रेड सेपरेटर वहां बनाया जाता है जहां बहुत सारे रेलमार्ग क्रास होते हैं। कटनी में यही स्थिति है। इस वजह से यहां स्टेशन में खड़े-खड़े ही गाड़ियां 20 से 45 मिनट तक लेट हो जाती हैं।

लंदन में बना पहला ग्रेड सेपरेटर : सबसे पहला ग्रेड सेपरेटर साल 1897 में लंदन में बनाया गया था। इसको रेल विभाग लंदन ने फ्लाई जंक्शन (उड़ता जंक्शन) नाम दिया। इससे रेल विभाग और यात्रियों को बहुत सुविधा हुई। इसके बाद लंदन में जगह-जगह ग्रेड सेपरेटर बनाए गए।

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